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मां पर लघुकथा : ममता का गणित
कितनी कच्ची और खट्टी कीवी रख दी मां आज मेरे टिफ़िन में, चखकर तो देखना तो था ना। ऑफिस से वापस आते ही अजय ने मां को दो ... -
आयशा आत्महत्या केस : सवाल आयशा से नहीं समाज से कीजिए.....
क्यों आयशा क्यों ? लेकिन यह क्यों तुम्हारे लिए भला क्यों कर होना चाहिए? यह तो समाज के ऐसे लोगों पर सजा व सबक़ की गाज ... -
मार्मिक कविता : ओ मेरी उदास अहिल्याओं
अपने तप बल से, उठना है तुम्हें, अत्याचार तिरस्कार नफरतों की खाइयों दरिंदगी के नर्क से न सहना जुल्म वीरांगनी -
बिटिया दिवस : सांझी होती थीं बेटियां...
कहीं नन्हे फरिश्ते नए रूप और शुभ बंधन लेकर आ रहे हैं। इस पूरे जीवनक्रम और सामाजिकता की बात करें तो पहले आंगन, तंदूर, ... -
lockdown story : रज्जन बी का मास्क
मास्क रज्जन बी के हाथ में था ।उन्होंने ध्यान से देखा और मुराद से कहा ये नीला मास्क तो दो तीन धुलाई में फट जाएगा इसमें ... -
रोमेंटिक हिन्दी कविता : मेरे जिस्म में दिखती तेरी रौशनाई है
तू अभी भी यहीं कहीं है मेरे आसपास तभी तो मेरे जिस्म में दिखती तेरी रौशनाई है -
वसंत ऋतु पर कविता : अबकि जो आएगा वसंत
अबकि जो आएगा वसंत, मैं जोगी को म ना लूंगी, महुआ बन बस जाऊंगी
