हिन्दी ग़ज़ल : वेदना का व्याकरण... पढ़ रहा हूं वेदना का व्याकरण मैं हूं समर में आज भी हर एक क्षण मैं सभ्यता के नाम पर ओढ़े गए जो नोंच फेंकू वो मुखौटे, आवरण ...