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श्रावण भौम प्रदोष पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग! व्रत रखने से मिलते हैं ये 5 अद्भुत लाभ

Lord Shiva Bhaum Pradosh Vrat 2026
25 अगस्त 2026 मंगलवार के दिन भौम प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन आने वाला प्रदोष भौम प्रदोष कहलाता है। श्रावण मास में पड़ने वाला 'भौम प्रदोष व्रत' धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। श्रावण मास के भौम प्रदोष का व्रत रखने के 5 प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं।

दुर्लभ संयोग:

  • श्रावण मास में मंगला गौरी व्रत के दिन प्रदोष वर्त का संयोग माता पार्वती और शिव की संयुक्त पूजा का दिन बना है।
  • मंगलवार होने से इस दिन हनुमानजी की पूजा का संयोग भी बना है। 
  • मंगलवार को जब प्रदोष आता है तो उसे भौम प्रदोष कहते हैं। ऐसा योग संयोग बहुत कम ही बनता है। इस दिन व्रत रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन श्रवण नक्षत्र में आयुष्यमान योग, रवि योग और सौभाग्य योग भी रहेगा। 
 

1. कर्ज मुक्ति और आर्थिक समृद्धि

भौम प्रदोष का व्रत मुख्य रूप से ऋण (कर्ज) से मुक्ति पाने के लिए रामबाण माना जाता है। मंगलवार और प्रदोष का यह योग आर्थिक बाधाओं को दूर करता है। इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करने से आय के नए मार्ग खुलते हैं और रुका हुआ धन वापस मिलता है।
 

2. मंगल दोष का निवारण

जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष (मांगलिक दोष) है, जिसके कारण विवाह में देरी, दांपत्य जीवन में तनाव या करियर में बाधाएँ आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है। श्रावण मास की पावन ऊर्जा से मंगल देव शांत होते हैं और शुभ फल देने लगते हैं।

3. भूमि, भवन और संपत्ति का सुख

ज्योतिष शास्त्र में मंगल देव को 'भूमि पुत्र' माना गया है। भौम प्रदोष का व्रत रखने से जमीन-जायदाद, नए मकान की खरीदारी या अचल संपत्ति से जुड़े विवादों में सफलता मिलती है। अगर प्रॉपर्टी का कोई काम लंबे समय से अटका हुआ है, तो वह शीघ्र पूरा होता है।
 

4. मुकदमों और शत्रुओं पर विजय

यह व्रत व्यक्ति के भीतर साहस, पराक्रम और आत्मविश्वास का संचार करता है। यदि आप किसी कोर्ट-कचहरी के मामले, कानूनी विवाद या गुप्त शत्रुओं से परेशान हैं, तो भौम प्रदोष का व्रत रखने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
 

5. असाध्य रोगों और भय से मुक्ति

श्रावण मास में प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में शिवजी की पूजा करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक तनाव दूर होता है। मंगल रक्त का कारक ग्रह है, इसलिए यह व्रत रक्त संबंधी बीमारियों, उच्च रक्तचाप (BP) और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
 
एक छोटा सा उपाय: भौम प्रदोष के दिन शाम को शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और हनुमान जी को गुड़ व चने का भोग लगाकर "ॐ नमः शिवाय" तथा "ऋणमोचक मंगल स्तोत्र" का पाठ करें।
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