सम्बंधित जानकारी
- Malmas 2025: 15 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होगा 'मलमास', एक महीने तक नहीं होंगे शुभ कार्य
- December 2025 Festivals: दिसंबर माह के प्रमुख व्रत और त्योहार, जानें विशेष जानकारी
- वर्ष 2026 में होंगे भारत में ये 5 बड़े काम, जिनकी हो गई है अभी से शुरुआत
- Kharmas 2025: खरमास क्यों रहता है क्या करना चाहिए इस माह में?
- January 2026: जनवरी 2026 के प्रमुख ग्रह गोचर राशि परिवर्तन
Dhanu Sankranti: धनु संक्रांति के दिन करें 3 अचूक उपाय, सूर्य और पितृ का दोष होगा दूर
Dhanu Sankranti 2025: धनु संक्रांति हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक पर्वों में से एक है। यह वह पावन क्षण होता है जब ग्रहों के राजा सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं। इस गोचर के साथ ही धार्मिक रूप से शुभ माने जाने वाले 'खरमास' या 'मलमास' की शुरुआत हो जाती है। यह पूरा महीना आत्म-चिंतन, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है।ALSO READ: Dhanu sankranti 2025: धनु संक्रांति कब है, क्या है इसका महत्व, पूजा विधि और कथा?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धनु संक्रांति के दिन विशेष उपाय करने से कुंडली में मौजूद सूर्य दोष, जो आत्मविश्वास की कमी, सरकारी कार्यों में बाधा या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देता है और पितृ दोष, जो पारिवारिक समस्याओं और जीवन में निरंतर बाधाओं का कारण बनता है, को शांत किया जा सकता है। इसलिए, यह दिन सूर्य और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अचूक अवसर है।
यदि आप सूर्य और पितृ दोष की शांति के लिए पारंपरिक उपाय जानना चाहते हैं, तो यहां 3 सरल और प्रचलित उपाय दिए जा रहे हैं...
1. सूर्य को अर्घ्य देना (जल अर्पित करना)
धनु संक्रांति के दिन प्रातःकाल सूर्य उदय के समय
* तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, गुड़ के कुछ कण और लाल चंदन मिलाएं।
* पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को अर्घ्य दें, मंत्र- 'ॐ नमः सूर्याय' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जप करें। मान्यतानुसार इससे सूर्य से जुड़े दोष, आत्मविश्वास की कमी और पितृ संबंधित बाधाएं कम होती हैं।
2. पितरों के लिए तिल जल या तर्पण: जो लोग पितृ शांति के उपाय करना चाहते हैं, वे धनु संक्रांति के दिन,
* काले तिल, जल, कुश और थोड़ा-सा दूध मिलाकर तिल तर्पण कर सकते हैं
* पितरों के नाम स्मरण करते हुए 'ॐ पितृदेवताभ्यो नमः' का जाप करें। मान्यतानुसार इस उपाय से पितृ दोष की शांति और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
3. दान और दीपदान: धनु संक्रांति पर दान विशेष फलदायी माना गया है। आप इनमें से कोई भी दान कर सकते हैं,
* गुड़, तिल, चावल, कंबल, घी, या पीले वस्त्र का दान करें।
* शाम को तुलसी या मंदिर में दीपदान करें। इस उपाय से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और ग्रहदोष शांत होने का फल बताया गया है।ALSO READ: Dhanu sankranti 2025: धनु संक्रांति कब है, क्या है इसका महत्व, पूजा विधि और कथा?
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
