1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. वसंत पंचमी
  4. basant panchami abhuj muhurat 2026

बसंत पंचमी 2026: बन रहे हैं दुर्लभ संयोग, शुभ कार्यों के लिए है 'अबूझ मुहूर्त'

basant panchmi puja, बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त
Basant Panchami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन कई दुर्लभ योगों के साथ-साथ 'अबूझ मुहूर्त' का महासंयोग भी बन रहा है। ऐसे में विवाह, वाहन खरीदारी, गृह प्रवेश और प्रॉपर्टी निवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। बसंत पंचमी को स्वयं सिद्ध 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती; पूरा दिन ही अत्यंत पवित्र होता है।
 

बसंत पंचमी तिथि का समय:

तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026 को 02:28 AM बजे से।
तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026 को 01:46 AM बजे तक।
 

बसंत पंचमी 2026 अबूझ मुहूर्त काल:

बसंत पंचमी 2026: अबूझ मुहूर्त का महत्व शास्त्रों के अनुसार, वर्ष में साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त होते हैं- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार बसंत पंचमी को भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है। इन मुहूर्तों में समय देखने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि संपूर्ण दिन-रात शुभता से युक्त होते हैं।
 

बसंत पंचमी 2026 के शुभ योग:

1. परिधि और शिव योग: इस दिन परिधि योग के पश्चात शिव योग का आगमन होगा, जो साधना के लिए श्रेष्ठ है।
2. रवि योग: यह योग समस्त दोषों का नाश करने वाला है। इस योग में पूजा करने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
3. सर्वार्थ सिद्धि योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किया गया कोई भी कार्य "सिद्ध" होता है। नया व्यापार या वाहन खरीदने के लिए यह सर्वोत्तम है।
4. अमृत सिद्धि योग: यह संयोग कार्यों में स्थायित्व और दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करता है।
 

ग्रहों की विशेष स्थिति:

मालव्य और शश राजयोग: कई वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जब शुक्र और शनि अपनी उच्च या स्वराशि में स्थित होकर राजयोग बना रहे हैं। यह स्थिति भौतिक सुखों और करियर में उन्नति के लिए लाभकारी है।
 
बुधादित्य योग: बुध और सूर्य की युति से बनने वाला यह योग विद्यार्थियों और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
 

इस दिन क्या करना रहेगा विशेष फलदायी?

अक्षर अभ्यासम: छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत करने या उन्हें पहली बार पेंसिल पकड़ाने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।
विद्या दान: निर्धन बच्चों को पेन, पुस्तकें या अन्य शैक्षणिक सामग्री दान करने से माँ सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पीले रंग का प्रयोग: इस दिन गुरु (बृहस्पति) और माँ सरस्वती का प्रभाव रहता है, अतः पीले वस्त्र धारण करना और पीले पकवानों का भोग लगाना भाग्यवर्धक माना जाता है।
विशेष सुझाव: इस वर्ष बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 07:00 बजे से दोपहर 12:35 बजे के मध्य रहेगा।
 
लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि की दस महाविद्याएं और उनका महत्व