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क्या शिक्षक को अब स्कूल और कॉलेज में पढ़ाना छोड़ देना चाहिए?
Teachers Day 2023 : ऐसे बहुत से कारण है जबकि अब स्कूल या कॉलेज में टीचर्स के लिए पढ़ाना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि क्या जरूरत है स्कूल और कॉलेज की? क्या शिक्षक को अब स्कूल और कॉलेज में पढ़ाना छोड़ देना चाहिए? आखिकर ऐसे क्या कारण है कि लोग अब यह सोचने पर मजबूर हैं।
स्कूल कॉलेज हैं राजनीति का अखाड़ा : यह तो पहले से ही होता आया है परंतु आजकल यह कुछ ज्यादा होने लगा है। स्कूल या कॉलेज में छात्रों को पढ़ाई करके अपना करियर बनाना चाहिए और अच्छा शिक्षण या प्रशिक्षण प्राप्त करके परिवार और देश की सेवा करना चाहिए, परंतु राजनीति के चक्कर में जो छात्र पढ़ना चाहते हैं उनकी भी पढ़ाई चौपट होने लगी है। अब स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रों को विचारांतरित करने के लिए पहले से ही सक्रिय रहते हैं वामपंथी, दक्षिणपंथी या पोंगापंथी लोग। देश में राजनीतिक विचारधाराओं की लड़ाई के चलते छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है क्योंकि इसके चक्कर में अब पढ़ाई कम छात्र राजनीति ज्यादा होती है। ऐसे में बेचारे शिक्षक दोनों तरफ से मार खाते हैं।
कोचिंग क्लास के दौरान में बिजनेस बन गई है शिक्षा : क्या जरूरत है किसी सरकारी स्कूल या कॉलेज में टीचर, प्रोफेसर आदि बनने की जरूरत। इससे ज्यादा रुपया तो कोचिंग क्लास चलाने वाले ही दे देंगे। पढ़ाई तो अब वहीं होने लगी है? यदि कोचिंग में ही पढ़कर करियर बनाना है तो क्या जरूरत है स्कूल या कॉलेज जाने की? सिर्फ परीक्षा के लिए? अब तो यह भी कहा जा रहा है कि वैसे भी अब योग्य शिक्षक कोचिंग क्लास में ही पाए जाते हैं?
ऑनलाइन शिक्षा प्राणाली : अब तो यूट्यूब या अन्य किसी प्लेटफार्म पर आप अच्छे से अच्छे टीचर से अपने कोर्स को समझकर परीक्षा की तैयारी कर सकते हो और वह भी एकदम मुफ्त में। यदि थोड़ा बहुत फीस देकर भी गणित या साइंस को ऑनलाइन माध्यमों से समझा जा सकता है तो स्कूल टीचर्स की क्या जरूरत? वैसे भी स्कूल टीचर्स कौनसा सभी बच्चों का ध्यान रखते हैं। कुछ खास बच्चों को ही ज्यादा अटेंशन मिलता है। आप अब यूट्यूब पर 10 सबसे अच्छे टीचर्स ढूंढ सकते हैं। हालांकि आजकल तो टॉप कोचिंग क्लासेस भी अपनी ऑनलाइन क्लासेस चलाती है।
टीनएजर्स को संभालना अब मुश्किल : स्कूल और कॉलेज के टीचर्स अब टीनएजर्स को नहीं संभाल पा रहे हैं। यह अवस्था सबसे खतरनाक होती है।दुनियाभर में जो सृजन या विध्वंस हो रहा है उसमें अधिकतर लोग इसी उम्र के लोग इन्वॉल्व है। अब यदि हम स्कूल से कॉलेज में प्रवेश की बात करें तो यह किशोरावस्था में ही होता है। किशोरावस्था किसी भी मनुष्य के जीवन का वसंत काल माना गया है। यदि इस अवस्था में अच्छी शिक्षा और संस्कार नहीं मिले हैं तो मूर्खता, अराजकता और विद्रोह ही उसके संस्कार होंगे। यही उसकी जीवन शैली होगी और वह खुद को अपनी जिंदगी बर्बाद करेगा ही साथ में दूसरे की जिंदगी को भी बर्बाद कर देगा। आए दिन हम अखबारों में पढ़ते रहते हैं कि छात्र ने टीचर को मारा या अपने ही सहपाठी को मार डाला। यानी स्कूल में अब टीचर्स और मैनेजमेंट के लिए इन टीनएजर्स की भीड़ को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। नशा, सेक्स, हिंसा, अधैर्य, विद्रोह, झूठ, चालाकी, चोरी, मक्कारी, जोड़ तोड़, जुगाड़, ईर्ष्या, लिव इन रिलेशनशिप और तमाम तरह की बुराइयां यहां पनप रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि शिक्षा के ये मंदिर देश का भविष्य बनाने के लिए है या बिगाड़ने के लिए?
