Solar Eclipse 2026: हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण योग का साया! 5 नियमों का करें पालन, ये 3 उपाय दिलाएंगे लाभ
Solar Eclipse 2026: वैदिक ज्योतिष में अमावस्या पर जब सूर्य, चंद्रमा और राहु या केतु का संयोग बनता है, तो इसे ग्रहण योग (या ग्रहण दोष) कहा जाता है। चूंकि अमावस्या पर मन के कारक 'चंद्रमा' और आत्मा के कारक 'सूर्य' की स्थिति संवेदनशील होती है, इसलिए इस दिन ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या पर पूर्ण सूर्य ग्रहण का योग बना है।
5 नियम (जो जरूर फॉलो करें)
सात्विक खान-पान रखें: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें। सात्विक और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करें।
नए व मांगलिक कार्यों को टालें: कोई नया व्यवसाय शुरू करना, गृह प्रवेश, सगाई या बड़ा आर्थिक निवेश इस योग के दौरान करने से बचें।
वाणी और क्रोध पर संयम रखें: ग्रहण योग के दौरान मानसिक अस्थिरता हो सकती है। वाद-विवाद, कटु शब्द बोलने और किसी का अपमान करने से बचें।
रात में सूनसान जगहों पर जाने से बचें: अमावस्या की रात नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है, इसलिए वीरान रास्तों, श्मशान या नदी तट के आसपास अकेले न जाएं।
घर व शरीर की पवित्रता बनाए रखें: प्रातःकाल स्नान के बाद ही पूजा-पाठ करें। घर में पोछे के पानी में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर सफाई करें ताकि नकारात्मकता दूर हो।
3 उपाय (जिनसे मिलेगा लाभ)
- जलदान
- तिलदान
- दीपदान
शिव जी की उपासना और मंत्र जाप: भगवान शिव चंद्र और सूर्य दोनों के कष्टों का निवारण करते हैं। इस दिन शिवलिंग पर जल व काले तिल अर्पित करें और "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
छाया दान और अन्न-वस्त्र का दान: एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और उस तेल का दान करें। साथ ही किसी जरूरतमंद को काले तिल, उड़द दाल, काला कपड़ा या सात प्रकार का अनाज (सप्तधान्य) दान करें।
पीपल के वृक्ष की सेवा: सुबह के समय पीपल के पेड़ में जल और दूध मिलाकर अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें।

