Hindu calendar festivals in vaishakh month: वैशाख मास हिंदू पंचांग का दूसरा महीना है, जिसे आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, 'न माधव समो मासो' अर्थात वैशाख (माधव मास) के समान कोई दूसरा महीना नहीं है। इस वर्ष 03 अप्रैल से वैशाख महीने का प्रारंभ हो गया है। वैशाख मास में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं, जैसे कि बैसाखी, अक्षय तृतीया, और मोहिनी एकादशी आदि।
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इस वर्ष वैशाख के शुभ अवसर पर, यहां इस माह की 10 सबसे खास बातें दी जा रही हैं:
1. त्रेता युग का आरंभ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग के बाद त्रेता युग का आरंभ वैशाख मास की तृतीया तिथि से ही हुआ था, जो इस महीने की गरिमा को और बढ़ाता है।
2. जल दान का महत्व
वैशाख में गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगता है, इसलिए इस माह में जल दान यानी प्यास बुझाना या लोगों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना या पक्षियों के लिए पानी रखना अत्यंत शुभ होता है।
3. भगवान विष्णु (माधव) की पूजा
इस पूरे महीने भगवान विष्णु के 'माधव' स्वरूप की पूजा की जाती है। 'माधव' नाम का अर्थ है 'लक्ष्मी के पति'। तुलसी पत्र से उनकी पूजा करने पर जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं। मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने का विशेष महत्व है।
4. अक्षय तृतीया का महापर्व
इस महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। यह एक 'अबूझ मुहूर्त' है, जिसमें किए गए दान और पुण्य का फल कभी समाप्त (अक्षय) नहीं होता। इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था।
5. गंगा स्नान का फल
6. पंखा और खरबूजे का दान
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस महीने में गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं जैसे—हाथ का पंखा, चटाई, घड़ा, सत्तू और खरबूजे का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
7. मोहिनी एकादशी
वैशाख मास में ही भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था ताकि समुद्र मंथन से निकले अमृत को असुरों से बचाकर देवताओं को पिलाया जा सके। आज का व्रत रखने से व्यक्ति मोह-माया के बंधनों से मुक्त होता है।
8. आर्थिक समृद्धि के उपाय
चूंकि यह महीना माता लक्ष्मी के पति (माधव) को समर्पित है, इसलिए इस दौरान श्री सूक्त का पाठ और सफेद वस्तुओं का दान आर्थिक उन्नति के द्वार खोलता है।
9. वैशाख स्नान का संकल्प
धार्मिक लोग पूरे वैशाख महीने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करने का संकल्प लेते हैं। इसे 'वैशाख स्नान व्रत' कहा जाता है।
10. बुद्ध पूर्णिमा
वैशाख माह की पूर्णिमा को ही गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। इसे 'पीपल पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है, जिस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।
विशेष: वैशाख मास में तेल मालिश करना, दिन में सोना और दो बार भोजन करना वर्जित माना गया है, ताकि शरीर और मन को सात्विक रखा जा सके।
वैशाख मास का प्रत्येक दिन पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस माह में धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यह समय नए आरंभ, कृषि, शिक्षा, और समाजिक मेलजोल के लिए आदर्श माना जाता है।
वैशाख मास FAQs
1. वैशाख मास कब शुरू होता है?
वैशाख मास हिन्दू पंचांग का दूसरा महीना है और यह चैत्र मास के बाद आता है। आमतौर पर यह अप्रैल–मई में पड़ता है।
2. वैशाख मास का धार्मिक महत्व क्या है?
वैशाख मास में कई धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और पूजा-पाठ किए जाते हैं। इस माह में पुण्य के कार्य, दान और गंगा स्नान विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।
3. बैसाखी का क्या महत्व है?
बैसाखी मुख्य रूप से फसल और नए साल का पर्व है। पंजाब में यह किसानों की नई फसल और धार्मिक उत्सव का प्रतीक है।
4. अक्षय तृतीया क्यों महत्वपूर्ण है?
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