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मार्गशीर्ष आरंभ : इस मास में पूजे जाते हैं ये देवी-देवता | Margashirsha Month Puja
Margashirsha Maas 2021: शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष महीने का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से भी है। इसी नक्षत्र के कारण इस माह का नाम मार्गशीर्ष माह पड़ा। हिंदू कैलेंडर (Hindu Calander) के अनुसार कार्तिक माह के बाद मार्गशीर्ष माह की शुरुआत होती है, जो नौवां महीना माना गया है। आओ जानते हैं कि इस माह में पूजे जाते हैं कौनसे देवी और देवता।
नोट: इस संपूर्ण माह में खासकर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की ही पूजा होती है। इसने अलावा भगवान श्रीराम और दत्तात्रेय को भी पूजा जाता है।
1. दत्तात्रेय जयंती : इसी माह में दत्तात्रेय भगवान की जयंती भी मनायी जाती है। इस माह की पूर्णिमा अर्थात 18 दिसंबर 2021 को भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाएगी। अतः उनका पूजन भी विशेष फलों को प्रदान करने वाला बताया गया है।
2. चंद्र पूजा : अगहन माह में ही चंद्रमा को सुधा प्राप्त हुई थी, जिसकी वजह से भी प्रभु कृपा के लिए यह माह उत्तम माना गया है। पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पूजन अतिश्रेष्ठ माना गया है।
3. भैरव पूजा : हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव जयंती मनाई जाती है, जिसे कालाष्टमी कहते हैं। मार्गशीर्ष माह में कालभैरव जयंती 27 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी।
4. विष्णु पूजा : मान्यता है कि इस माह में भगवान विष्णुजी की या उनके ही स्वरूप भगवान कृष्ण की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यह माह उनके पूजन के श्रेष्ठ माह में से एक बताया जाता है। इस माह में 30 नवंबर 2021 को उत्पन्ना एकादशी व्रत और 14 दिसंबर को मौना एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
5. श्रीकृष्ण पूजा : इस माह में श्रीकृष्ण पूजा और गीता ग्रंथ पूजा का खास महत्व रहता है। गीत में श्रीकृष्ण ने कहा भी है कि मैं मासों में मार्गशीर्ष हूं। इसी माह में गीता जयंती मनाई जाती है जो 14 दिसंबर 2021 को है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जब गीता ज्ञान दिया गया तब मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की तिथि एकादशी थी जिसे मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। संभवत: उस दिन रविवार था। कलियुग के प्रारंभ होने के मात्र तीस वर्ष पहले, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन, कुरुक्षेत्र के मैदान में, अर्जुन के नन्दिघोष नामक रथ पर सारथी के स्थान पर बैठ कर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश किया था। इसी तिथि को प्रतिवर्ष गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। कहते हैं प्रथम दिन का उपदेश प्रात: 8 से 9 बजे के बीच हुआ था।
6. सभी देवता के लिए महत्वपूर्ण है यह माह : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सतयुग में सभी देवताओं ने मिलकर मार्गशीर्ष मास की प्रथम तिथि को वर्ष का आरंभ किया था। इसलिए इस दिन सभी देवों का स्मरण किया जाता है।
7. तुलसी पूजा : मार्गशीर्ष माह में तुलसी की जड़ों से मिट्टी निकालकर शरीर पर इसका लेप लगाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के दौरान नमो नारायणाय या गायत्री मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी होता है।
8. श्रीराम पूजा : इसके अलावा माता अन्नपूर्णा की जयंती, त्रिपुर भैरवी जयंती और श्रीराम विवाहोत्सव भी मनाया जाता है।
