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बढ़ी राधे मां की मुश्किल

Radhe maa
मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह शहर में रहने वाली उस महिला का बयान दर्ज करे, जिसका आरोप है कि स्वयंभू माता सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां ने उसके ससुराल वालों को उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने के लिए उकसाया था।
 
न्यायमूर्ति साधना जाधव ने निकी गुप्ता की याचिका पर हाल ही में सुनवाई करते हुए बोरीवली पुलिस को ये निर्देश दिए। याचिका में अनुरोध किया गया था कि उसके बयान के आधार पर उसे आगे की जांच में पुलिस की मदद की अनुमति दी जानी चाहिए।
 
उच्च न्यायालय ने बोरीवली पुलिस से कहा कि वह निकी का बयान दर्ज करे और जरूरत पड़ने पर कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई करे। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस ने इस आधार पर आरोपियों की सूची से राधे मां का नाम हटा दिया कि उनके खिलाफ कोई गवाह नहीं है और उन्हें (निकी को) इस बारे में बताया भी नहीं गया। 
 
निकी ने अनुरोध किया कि पुलिस को उसका बयान दर्ज करना चाहिए और आगे की जांच करनी चाहिए। शिकायतकर्ता ने अनुरोध किया, 'यदि सबूत मिल जाता है तो राधे मां के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।'
 
निकी ने कहा कि पुलिस ने उसे राधे मां के खिलाफ लगे आरोप हटाने के बारे में सूचित नहीं किया और मजिस्ट्रेट के सामने इस मुद्दे पर रिपोर्ट भी दायर नहीं की। इसलिए उसे जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने का अवसर नहीं मिला।
 
उच्च न्यायालय का मानना था कि अगर शिकायतकर्ता जांच से संतुष्ट नहीं है, तो उसे आगे जांच की मांग करने का अधिकार है।
 
पुलिस को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने का निर्देश देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस आपराधिक दंड संहिता के तहत आगे जांच कर सकती है। फिर भले ही आरोपी के खिलाफ लगे आरोप हटाए जा चुके हों। (भाषा) 
 
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