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भानु सप्तमी के दिन क्या करते हैं?
Bhanu Saptami Vrat: हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो बार सप्तमी तिथि पड़ती है और यदि रविवार को सप्तमी तिथि आ जाती है तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है। इस बार 22 दिसंबर रविवार को यह सप्तमी रहेगी। भानु का अर्थ है सूर्य यानी यह सूर्य सप्तमी है। इस दिन व्रत रखकर सूर्य देव का पूजन करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। पुराणों में भानु सप्तमी को अचला सप्तमी, अर्क, रथ और पुत्र सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य पूजन से ग्रह संबंधित परेशानियां दूर होती है तथा जीवन में ग्रहों का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इस दिन व्रतधारियों को भोजन में नमक नहीं लेना चाहिए।ALSO READ: भानु सप्तमी कब है, क्या महत्व है और जानिए पौराणिक कथा
भानु सप्तमी व्रत रखने के फायदे क्या है?
- भानु सप्तमी के दिन की व्रत रखकर भगवान सूर्य की आराधना करने वाले को हर कार्य में विजय मिलती है
- इस सप्तमी के दिन व्रत रखने से समस्त रोगों का नाश होकर व्रतधारी को आरोग्य प्राप्त होता है।
- नवग्रहों में सूर्यदेव को प्रधान स्थान होने के कारण भगवान रवि या भास्कर की विशेष कृपा मिलती है
- इस व्रत से सूर्य ग्रह कोई भी दुष्प्रभाव उक्त मनुष्य के जीवन पर नहीं पड़ता है।
- शास्त्रों में सूर्य को आरोग्यदायक माना और कहा गया है। अत: इनकी उपासना से रोग मुक्ति आसान हो जाती है।
- इस व्रत की धार्मिक मान्यता के मुताबिक यह व्रत संतान प्राप्ति तथा पिता-पुत्र में प्रेम बढ़ाने हेतु भी इस व्रत का अधिक महत्व माना गया है।
- आज बदलते समय के तथा वर्तमान में आज सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में अधिक किया जाने लगा है, अत: सूर्य की तरफ मुख करके सूर्य स्तुति करने से शारीरिक बीमारी तथा चर्म रोग, हड्डियों की कमजोरी तथा जोड़ों में दर्द आदि समाप्त जाते हैं।
भानु सप्तमी के दिन क्या करते हैं?
- इस दिन सूर्योदय होने से पूर्व जल्दी उठकर स्नान कर लें और व्रत का संकल्प लें।
- स्नान करने के बाद उगते सूर्य की आराधना करते हैं।
- सूर्यदेव को विधिवत रूप से अर्घ्य अर्पित करें।
- भानु सप्तमी के दिन 'ॐ घृणि सूर्याय आदित्याय नमः' मंत्र का जाप करें।
- इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ तथा मंत्र जाप करना विशेष लाभकारी होता है।
- इस दिन संकल्प लेकर व्रत करने तथा विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन करके भगवान सूर्यदेव की आरती करने से जीवन के समस्त दुखों का निवारण होता है।
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