सम्बंधित जानकारी
- Mahashivratri upay: महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं दुर्लभ योग, रात को इस समय जलाएं दीपक
- कुंभ राशि में सूर्य-राहु की युति: 13 फरवरी से 'ग्रहण योग', इन 4 राशियों के लिए सावधानी का समय
- विजया एकादशी 2026: 13 फरवरी को रखा जाएगा व्रत, जानिए तिथि, महत्व और नियम
- वरुण का दुर्लभ गोचर: 168 साल बाद मीन राशि में, 6 राशियों पर पड़ेगा गहरा असर
- चार धाम यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन जरूरी, यहां देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
Janaki Jayanti 2026: जानकी जयंती 2026: सीताष्टमी पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत का महत्व
Sita Ashtami 2026: उत्तर भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार, प्रतिवर्ष फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है। इसे सीता जयंती और सीताष्टमी के नाम से भी जाना जाता हैं। माता सीता त्याग, पवित्रता, धैर्य और आदर्श नारीत्व की प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए यह दिन विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। आज जानकी जयंती के साथ-साथ कालाष्टमी तथा मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है।ALSO READ: Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर क्या करें और क्या नहीं?
- 2026 में जानकी जयंती सीताष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
- पूजा के शुभ समय (मुहूर्त)
- सरल और शास्त्रसम्मत सीताष्टमी की पूजा विधि
-
सीताष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
2026 में जानकी जयंती सीताष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण अष्टमी का प्रारंभ- 9 फरवरी 2026 को सुबह 05:01 बजे।
अष्टमी तिथि समापन- 10 फरवरी 2026, सुबह 07:27 बजे।
चूंकि अष्टमी तिथि का प्रारंभ 05:01 मिनट से हो गया है, इसलिए उदयातिथि के हिसाब से 9 फरवरी 2026, दिन सोमवार को जानकी जयंती मनाई जाएगी।
पूजा के शुभ समय (मुहूर्त)
ब्रह्म मुहूर्त- 05:21 ए एम से 06:12 ए एम
प्रातः सन्ध्या- 05:46 ए एम से 07:04 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:26 पी एम से 03:10 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 06:04 पी एम से 06:30 पी एम
सायाह्न संध्या- 06:07 पी एम से 07:24 पी एम
अमृत काल- 10:04 पी एम से 11:51 पी एम
निशिता मुहूर्त- 10 फरवरी 12:09 ए एम से 01:01 ए एम तक।
सरल और शास्त्रसम्मत सीताष्टमी की पूजा विधि
1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ, हल्के रंग के पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
2. घर के पूजा स्थान को साफ कर चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
3. भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
4. दीप प्रज्वलित करें और गणेश जी का स्मरण कर पूजा आरंभ करें।
5. माता सीता को हल्दी, कुमकुम, चंदन, पुष्प, अक्षत अर्पित करें।
6. सीता माता को फल, मिठाई और खीर, मखाना, पंचामृत आदि का भोग लगाएं।
7. मंत्र जप करें:
'ॐ श्री सीतायै नमः'
'श्री जानकी रामाभ्यां नमः'
8. रामायण के सुंदरकांड या सीता स्तुति का पाठ करें।
9. अंत में आरती कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
10. इस दिन महिलाएं और श्रद्धालु व्रत रखते हैं।
11. व्रत निर्जल, फलाहार या एक समय भोजन के रूप में किया जा सकता है।
12. व्रत के दौरान सात्त्विक आचरण, सत्य और संयम का पालन करें।
13. अगले दिन प्रातः पूजा कर व्रत का पारण करें और जरूरतमंदों को दान दें।
सीताष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
सीताष्टमी व्रत के धार्मिक महत्व के अनुसार यह व्रत सौभाग्य, धैर्य और मानसिक बल प्रदान करता है। माता सीता की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है। पति की लंबी आयु और परिवार में प्रेम-समरसता के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत श्रेष्ठ वर प्राप्ति का प्रतीक माना गया है। माता सीता की कृपा से जीवन में संयम, सहनशीलता और धर्मबुद्धि का विकास होता है।
मान्यता के हिसाब से इस दिन दान-पुण्य, वस्त्र, अन्न और सुहाग सामग्री का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर घर में माता सीता को समर्पित भजन-कीर्तन करने से घर का वातावरण सकारात्मक होता है।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Mahashivratri upay: महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं दुर्लभ योग, रात को इस समय जलाएं दीपक
Edited BY: Raajshri Kasliwal
