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नागपंचम का पर्व क्यों मनाया जाता है, महत्व और पौराणिक कथा

नाग पंचम पर्व
गुजरात में, नाग पंचम का पर्व गुजराती कैलेण्डर के अनुसार श्रावण माह में कृष्ण पक्ष पञ्चमी पर मनाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में भाद्रपद कृष्ण पंचमी पर यह पर्व मनाया जाता है। हालांकि दोनों का दिन एक ही रहता है। कैलेंडर में भी भेद है। इस दिन गोगा पंचमी और भाई भिन्ना पर्व भी रहता है। नाग पंचमी (नागपंचम) का पर्व सनातन संस्कृति में नाग देवताओं के प्रति आभार प्रकट करने, सर्प भय से मुक्ति पाने और प्रकृति के संरक्षण के संदेश के रूप में मनाया जाता है।
 
नाग पञ्चम पूजा मुहूर्त- 1 सितंबर 2026 प्रात: 07:41 से 08:53 बजे तक।
 

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

पर्यावरण एवं कृषि चक्र में संतुलन: वर्षा ऋतु में सांप अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं। नाग खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले चूहों और कीटों को खाकर किसानों के मित्र बनते हैं। इसी उपकार के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए यह पर्व मनाया जाता है।
 
धार्मिक मान्यता: भगवान शिव के गले का हार वासुकि नाग हैं और भगवान विष्णु की शैय्या शेषनाग हैं। इसलिए नागों की पूजा सीधे त्रिदेवों की कृपा से जुड़ी मानी जाती है।
 

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

कालसर्प दोष से मुक्ति: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन नाग देवता की पूजा, जलाभिषेक और दूध अर्पित करने से कुंडली के 'कालसर्प दोष' और 'राहु-केतु' के बुरे प्रभावों से राहत मिलती है।
 
अकाल मृत्यु एवं सर्प भय का नाश: पौराणिक मान्यता है कि पंचमी के दिन अष्टनागों (अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र) का पूजन करने से घर में सर्प भय समाप्त होता है और परिवार की रक्षा होती है।
 

पौराणिक कथाएँ

1. जनमेजय का सर्पमेध यज्ञ और आस्तीक मुनि

महाभारत के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हुई थी। इसका बदला लेने के लिए उनके पुत्र जनमेजय ने पृथ्वी से सभी सर्पों का विनाश करने के लिए 'सर्पमेध यज्ञ' प्रारंभ किया। इस यज्ञ की अग्नि में खिंचकर विश्व के सभी सर्प भस्म होने लगे।
 
तब सर्पों की रक्षा के लिए आस्तीक मुनि (माता मनसा देवी के पुत्र) ने राजा जनमेजय को समझाकर इस विनाशकारी यज्ञ को रुकवाया। जिस दिन यह यज्ञ रुका और नागों के प्राण बचे, वह सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। सर्पों को जलन से राहत दिलाने के लिए उन पर दूध और जल चढ़ाया गया। तभी से नाग पंचमी पर नाग पूजन और दूध अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई।
 

2. कालिया नाग और श्रीकृष्ण प्रसंग

श्रीमद्भागवत के अनुसार, यमुना नदी में कालिया नाग के विष के कारण पानी जहरीला हो गया था। बाल कृष्ण ने यमुना नदी में कूदकर कालिया नाग का घमंड तोड़ा और उसे यमुना छोड़कर रसातल जाने का आदेश दिया। जब कालिया ने प्रभु से क्षमा मांगी और यमुना खाली कर दी, तो ब्रजवासियों ने पंचमी के दिन उत्सव मनाया और नाग देवता की पूजा की।
 

पूजा विधि एवं नियम

इस दिन घर के दरवाजे के दोनों तरफ गोबर या रोली से नाग की आकृति बनाई जाती है।
नाग देवताओं को दूध, धान का लावा (खील), पुष्प और दूर्वा अर्पित की जाती है।
विशेष नियम: नाग पंचमी के दिन भूमि की खुदाई करना, खेत जोतना या साग-सब्जी काटना वर्जित माना जाता है।
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