यूपी MLC चुनाव से BJP के लिए सबक, कट सकते हैं 50% से ज्यादा विधायकों के टिकट
BJP Strategy UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के नतीजों ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा (BJP) के शीर्ष नेतृत्व को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया है। हालांकि बीजेपी ने 11 में से 6 सीटें जीतकर तकनीकी बढ़त बनाए रखी है, लेकिन वाराणसी, लखनऊ और आगरा जैसे मजबूत गढ़ गंवाने और गोरखपुर में मामूली अंतर से मिली जीत ने साफ कर दिया है कि 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद भी मतदाताओं का असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
MLC नतीजों से मिले बड़े संकेत
यूपी एमएलसी चुनाव के नतीजे यह साबित करते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी की बढ़त कोई तुक्का नहीं थी। मतदाताओं की नाराजगी और स्थानीय स्तर की शिकायतें अब भी कायम हैं। समाजवादी पार्टी ने वाराणसी स्नातक और शिक्षक सीटें बरकरार रखने के साथ ही भाजपा से लखनऊ स्नातक और आगरा शिक्षक सीटें भी छीन लीं। वाराणसी तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में सपा द्वारा वहां सीटें बरकरार रखना भी एक तरह से भाजपा की 'मनोवैज्ञानिक' हार है। ALSO READ: वाराणसी और नागपुर में भाजपा की हार! क्या 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए खतरे की घंटी हैं MLC नतीजे?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाले क्षेत्र गोरखपुर में भाजपा की जीत का अंतर महज 307 वोटों का रहा, जो पार्टी के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। दरअसल, एमएलसी चुनाव में शिक्षक और स्नातक ही मतदाता होते हैं। इन सीटों पर हार या कड़ा मुकाबला भाजपा के प्रति इस वर्ग की असहजता को दर्शाता है।
PDA का दायरा और 'वैश्य' कार्ड
आगरा में सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल की जीत के बाद अखिलेश यादव ने अपने 'PDA' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में 'A' का दायरा बढ़ाकर 'अग्रवाल/वैश्य' समुदाय तक करने का दावा किया, जो बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंधमारी का सीधा संकेत है। माना जा रहा है कि सोशल इंजीनियरिंग का यह फॉर्मूला सपा विधानसभा चुनाव 2027 में भी अपना सकती है। ALSO READ: चाचा है तो सपा है... लखनऊ में लगे होर्डिंग से अखिलेश गायब, MLC चुनाव के बाद गर्माई सपा की सियासत
भाजपा की भावी रणनीति पर क्या पड़ेगा असर?
एमएलसी चुनावों के नतीजों के बाद राज्य में भाजपा अपनी चुनावी रणनीति में कई बड़े और कड़े बदलाव कर सकती है। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनावों के विश्लेषण में यह बात सामने आई थी कि कई सांसदों के टिकट न बदलना भाजपा को भारी पड़ा था। एमएलसी नतीजों के बाद अब चर्चा तेज है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने आधे से ज्यादा विधायकों के टिकट काटकर नए और स्वच्छ छवि वाले चेहरों को मैदान में उतार सकती है। ALSO READ: MLC चुनाव में हार के बाद अखिलेश यादव पर BJP का पलटवार, बोली- 'जीतें तो जनसमर्थन, हारें तो चुनाव आयोग दोषी
यूजीसी के सामाजिक समानता नियमों और अन्य प्रशासनिक फैसलों को लेकर उच्च जातियों में पनपे असंतोष को दूर करने के लिए पार्टी को विशेष प्रयास करने होंगे। दरअसल, सवर्णों को भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। जेन-जी पीढ़ी विधानसभा चुनावों में पार्टी के खिलाफ नहीं जाए, इसका भी भाजपा संगठन को पूरा ध्यान रखना होगा। जमीनी स्तर पर जनता और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी को कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। हालांकि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ कार्यकारिणी की बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि यूपी में भाजपा अंगद का पैर है, उसे कोई हिला नहीं सकता।

