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क्‍या किडनी खराब कर रहा इंदौर का पानी? कांग्रेस के दावे में पानी के 98 सैंपल फेल, महापौर ने पानी पीकर दी चुनौती

इंदौर में पिछले 5 साल में डायलिसिस के 59 फीसदी मरीज बढ़े, क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर्स?

Indore Water
इंदौर के भागरीरथपुरा में पिछले दिनों दूषित पानी पीने से 36 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद से इंदौर के देश के सबसे स्‍वच्‍छ शहर होने के तमगे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में इंदौर जल संकट की त्रासदी ने एक बार फिर से पानी पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगा दिया है।

दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में दूषित पानी की सप्लाई को लेकर नगर निगम और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की जांच में 240 में से 98 पानी के सैंपल फेल पाए गए, जिनमें ई-कोलाई समेत हानिकारक बैक्टीरिया मिले हैं। जीतू पटवारी ने सरकार से इंदौर का वाटर ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इंदौर में पानी की वजह से किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए इंदौर के महापौर पुष्‍यमित्र भार्गव सोमवार को सुदामा नगर इलाके में पहुंचे। वहां स्‍थानीय लोगों की मौजूदगी में सीधे नल से आने वाला पानी पिया और कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए चुनौती दी।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या वाकई पानी की वजह से किडनी पर कोई असर होता है। वेबदुनिया ने इस मुद्दे पर शहर के जानेमाने नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्‍टरों और विशेषज्ञों से चर्चा की। जानते हैं कांग्रेस के दावे में आखिर कितना दम है और कैसे पानी आम लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

क्‍या है कांग्रेस का दावा : कांग्रेस नेता और प्रदेश अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में आयोजित एक प्रेसवार्ता में बताया कि उन्‍होंने इंदौर में पिये जाने वाले पानी के 240 सैंपल की जांच करवाई थी, जिसमें से 98 पानी के सैंपल फेल पाए गए है। उन्‍होंने दावा किया कि इस पानी में ई-कोलाई समेत दूसरे हानिकारक बैक्टीरिया मिले हैं, जो लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हैं। कांग्रेस ने इंदौर के 29 वार्डों से पानी के सैंपल लिए, जिन्हें रासायनिक जांच के लिए दिल्ली भी भेजा गया। जांच में 240 में से 98 सैंपल फेल पाए गए। पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया सहित अन्य हानिकारक बैक्टीरिया मिले, जो डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। जीतू पटवारी ने सरकार से इंदौर का वाटर ऑडिट कराने की मांग की है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और सांसद शंकर लालवानी को सौंपी जाएगी।

महापौर भार्गव ने दी चुनौती, रिपोर्ट में हेराफेरी : इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने विपक्षी पार्टी पर इंदौर की छवि खराब करने के लिए रिपोर्ट के आंकड़ों और ब्योरे में हेरफेर करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने तकनीकी खामियां निकालते हुए कहा कि जीतू पटवारी ने पूरे शहर से 240 नमूने जमा करने का दावा तो किया, लेकिन उनकी सौंपे गए ब्योरे में केवल 130 लोगों के ही नाम दर्ज थे, जिनके घरों से ये सैंपल लिए गए थे। भार्गव ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस बाकी बचे हुए लोगों के नाम और पते भी उजागर करती है, तो हम उनके घरों पर भी अपनी टीम भेजकर पीने के पानी की निष्पक्ष जांच करवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर्स...?
इंदौर के जानेमाने नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ शिवशंकर शर्मा ने बताया कि इंदौर में ही नहीं, पूरी दुनिया में ही किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं, इसके पीछे डायबिटीज, वर्क फ्राम होम कल्‍चर, लाइफ स्‍टाइल आदि है। इसके साथ ही इस दौर में दर्द निवारक मेडिसिन के सेवन का चलन बढ़ा है। नेचरोपैथी दवाइयां भी एक वजह है। विज्ञापन देखकर आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन भी किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। डायनापार अमिकासन एंटीबायोटिक इंजेक्‍शन भी घातक हो सकते है, झोलाछाप डॉक्‍टर लगाते हैं। जिम कल्‍चर में प्रोटीन पावडर का सेवन भी। उन्‍होंने बताया कि किसी भी तरह का डायरिया किडनी खराब कर सकता है। पानी की वजह से डायरिया होता है, जिससे लीवर आंत (जीआई ट्रैक) पर असर होता है, इस वजह से डायरिया और फिर किडनी अफैक्‍ट होती है।

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ श्रद्धा गोस्‍वामी ने बताया कि किडनी पर असर में डायबीटीज एक बड़ी वजह है। इसके साथ कम उम्र में बच्‍चों में मोटापा होना। हमारे इंदौर में हर खाने में नमक की मात्रा ज्‍यादा होना। बीमार होने पर नीम- हकीम और आयुर्वेदिक दवाइयां लेना, दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना। हमारे यहां परंपरा है कि लोग डॉक्‍टरों के पास जाने की बजाए अपने रिश्‍तेदारों की सलाह मानते हैं और घरेलू इलाज लेते हैं। जहां तक पानी की बात है तो यह सीधे किडनी पर असर नहीं करता, लेकिन अमानक या दूषित पानी की वजह से डायरिया होता है और डायरिया से किडनी पर असर होता है। जैसे भागीरथपुरा में हुआ था।

10 साल में शहर में 84 किडनी ट्रांसप्लांट : नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप सालगिया ने बताया कि शहर में वर्तमान में 500 से अधिक डायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं। वहीं करीब 3500 से अधिक मरीज किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। पिछले दस वर्षों में शहर में 84 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। वहीं 189 मरीज अभी भी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग सूची में हैं

एमवाय हास्पिटल में 18 मशीनें : एमवाय अस्पताल की डायलिसिस यूनिट की नर्सिंग हेड निखिता यादव ने बताया कि एमवाय में शुरुआत केवल दो डायलिसिस मशीनें थी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब यहां 18 मशीनें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस संक्रमित मरीजों के लिए अलग मशीन की व्यवस्था है। यहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का भी सुरक्षित तरीके से डायलिसिस किया जाता है। हाल ही में 12 मरीजों की डायलिसिस की गई।
Indore Water
क्‍या कहते हैं मरीज : 34 साल के विक्रम पटेल ने बताया कि वे 2023 से किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि वे अब तक 105 से ज्‍यादा बार डायलिसिस करा चुके हैं। वे एमवाय अस्पताल में हफ्ते में दो बार डायलिसिस करवाते हैं। परिवार से किसी से भी किडनी मैच नहीं हुई है।

किस साल कितने हुए डायलिसिस
वर्ष      मरीज
2021    3,490
2022    3,663
2023    4,079
2024    4,420
2025    5,547    
स्रोत:  एमवाय अस्पताल

शहर में 500 से ज्यादा डायलिसिस मशीनें : नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप सालगिया ने बताया कि शहर में वर्तमान में 500 से अधिक डायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं। वहीं करीब 3500 से अधिक मरीज किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। पिछले दस वर्षों में शहर में 84 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। वहीं 189 मरीज अभी भी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग सूची में हैं 
  • इंदौर में किडनी रोगियों की संख्या में वृद्धि, डायलिसिस के मामलों में 59% की बढ़ोत्तरी।
  • एमवाय अस्पताल में डायलिसिस मरीजों की संख्या बढ़ने से 18 मशीनें संचालित।
  • शहर में 500 से अधिक डायलिसिस मशीनें उपलब्ध, लगभग 3500 मरीज किडनी की समस्या से ग्रस्त।
  • इंदौर में पिछले दस वर्षों में 84 किडनी ट्रांसप्लांट, 189 मरीज वेटिंग लिस्ट में।
यह हकीकत है इंदौर की : यह सही है कि इंदौर देश का सबसे स्‍वच्‍छ शहर है। लेकिन पानी की गुणवत्ता के मामले में यह सबसे संक्रमित शहर बनता जा रहा है। लोग किडनी जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हर साल पानी और सीवरेज व्यवस्था पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद शहर में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। हाल ही में कई इलाकों से दूषित और गंदे पानी की तस्‍वीरें और वीडियो देखने को मिले।
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें
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