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Parenting Tips: सिंगल चाइल्ड की परवरिश में क्या आप भी कर रहे हैं ये गलतियां, बच्चे की मानसिकता पर पड़ सकता है बुरा असर
जानिए इकलौते बच्चे की परवरिश में किन बातों का ध्यान रखना है ज़रूरी
Indian Family
How do you take care of only child: हर माता-पिता के लिए बच्चों की परवरिश एक चुनौती होती है। लेकिन अगर बच्चा इकलौता हो तो यह चुनौती और भी बढ़ जाती है। इकलौते बच्चे को माता पिता का भरपूर लाड़-प्यार मिलता है लेकिन कभी-कभी पैरेंट्स सिंगल चाइल्ड की परवरिश के मामले में कुछ कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो बच्चे के विकास में बाधक हो सकती हैं और बच्चे के मानसिक एवं भावनात्मक विकास पर भी दुष्प्रभाव डालती हैं। आज इस आलेख में हम जानते हैं कि इकलौते बच्चे की परवरिश में पैरेंट्स को किन गलतियों से बचना चाहिए। ALSO READ: क्या बच्चों के लिए कूल पैरेंट्स बनना सही है? जानिए टीनएज में कैसे रखें बच्चों का खयाल
पैरेंट्स को ओवर प्रोटेक्शन से बचना चाहिए
सिंगल चाइल्ड के मामले में अक्सर पैरेंट्स ओवर प्रोटेक्टिव हो जाते हैं। माता-पिता बच्चे को तकलीफों से बचाने के नाम पर दुनिया में मुश्किलों का सामना नहीं करने देते हैं। यह सही नहीं है। ये बहुत जरूरी है कि बच्चे की सुरक्षा के साथ उन्हें बाहरी दुनिया का ज्ञान भी हो। इसके लिए ज़रूरी है कि उन्हें घुलने मिलने दिया जाए। ऐसा नहीं करने से बच्चे सामाजिक नहीं बन पाते हैं।
बच्चे की हर जिद पूरी करना
कुछ पैरेंट्स ये ससोच रखते हैं कि हमारा एक ही बच्चा है और अगर हम उसकी इच्छाएं भी पूरी न कर पाएं तो क्या फायदा। इस सोच के कारण बहुत से माता-पिता बच्चे की हर जिद पूरी करते चले जाते हैं। यह सोच गलत है। कई बार माता-पिता ये जानते हुए कि बच्चा गलत चीज की जिद कर रहा है, उसकी बात माँ लेते हैं। इससे बच्चे का स्वभाव जिद्दी हो जाता है और उसे मना करना स्वयं माता-पिता के लिए संभव नहीं रह जाता।
बच्चे को लाड़-प्यार के नाम पर कुछ माता-पिता उसे अनुशासन सिखाना ही भूल जाते हैं। वे बच्चे को यह भी नहीं सिखा पाते हैं कि उसे बड़ों के साथ और अन्य लोगों के साथ कैसे पेश आना चाहिए। अगर ध्यान न दिया जाए तो ऐसे बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका रहती है। आगे चलकर यह स्वभाव बहुत बड़ी समस्या बन जाता है।
पर्याप्त समय न देना
यदि बच्चा इकलौता है तो माता –पिता के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि वे उसे पर्याप्त समय दें। इकलौते बच्चे के मामले में यह और भी आवश्यक हो जाता है, क्योंकि उसके पास अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए कोई भाई या बहन नहीं है। कभी-कभी माता-पिता बच्चे की अच्छी परवरिश के चक्कर में पूरा समय बस ऑफिस और काम में बिता देते हैं। यह बच्चे के मानसिक विकास के लिए बहुत घातक है। अच्छी परवरिश का अर्थ केवल पैसा नहीं है।
बच्चे की भावनाओं को ना दबाएँ
बच्चे को हमेशा खुश रखने के चक्कर में माता-पिता कई बार उसकी भावनाओं को दबाने का काम करते हैं। अगर बच्चा किसी बात के लिए रोता है तो उसे रोने भी दें। उससे ये न कहें कि इतनी सी बात के लिए नहीं रोना चाहिए। अगर बच्चा किसी शोर से डर जाए तो उसे समझाएं कि ऐसी स्थिति में डरना स्वाभाविक है। साथ ही उसे उन तरीकों के बारे में बताएं, जिनसे वो अपने डर पर नियंत्रण पा सकता है। ऐसा करने से न केवल बच्चों की भावनाएं विकसित होती हैं, बल्कि वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना भी सीखते हैं।
परफेक्ट होने के लिए दबाव डालना
कभी-कभी बच्चे से परफेक्ट होने की उम्मीद करना भी उस पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। कुछ माता-पिता सोचते हैं कि वह अपने बच्चे की खुशी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, तो बच्चे को भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए। कई बार ये उम्मीदें करियर से जुड़ी भी होती हैं। इसमें इस बात की अनदेखी हो जाती है कि बच्चा स्वयं क्या चाहता है। माता-पिता उसे ऐसे काम में परफेक्ट देखना चाहते है, जिसमें शायद उसकी रुचि नहीं होती। ऐसी स्थिति में या तो बच्चा कुंठित हो जाता है या फिर वह माता-पिता के प्रति असम्मान की भावना से भर जाता है।
