सम्बंधित जानकारी
- मध्यप्रदेश में भाजपा को महंगी पड़ी यह चूक, सीएम बन गए कमलनाथ
- शाओमी ने लांच किया Redmi Note 6 Pro, मार्केटिंग हेड से जानिए फीचर (वीडियो)
- 14 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और अमानवीय सलूक, तांत्रिक समेत चार गिरफ्तार
- शर्मनाक, गड़े धन के लालच में नाबालिग पर ढाया कहर, रेप के साथ ही मारते थे कील लगे चाबुक
- कम्प्यूटर बाबा ने खोला अखाड़ा परिषद के खिलाफ मोर्चा, नया अखाड़ा बनाने की तैयारी
30 साल बाद पिता की तरह ज्योतिरादित्य भी मप्र के मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए
भोपाल। कहते हैं कि 'इतिहास अपने आपको दोहराता है।' इसका उदाहरण मध्यप्रदेश में एक बार फिर देखने को मिला। लगभग 30 साल पहले कांग्रेस के नेता माधवराव सिंधिया प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे, वहीं इस बार उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ऐसा हुआ है और वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए।
जनवरी 1989 में चुरहट लॉटरी कांड के चलते अर्जुनसिंह को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन राजीव गांधी की इच्छा के बावजूद सिंह के आलाकमान पर दबाव के चलते माधवराव सिंधिया तब मुख्यमंत्री नहीं बन सके थे।
सिंह समर्थक हरवंश सिंह के भोपाल बंगले में सिंह के समर्थक विधायकों का डेरा इसलिए डला रहा कि कांग्रेस के पर्यवेक्षकों को यह संदेश दिया जा सके कि विधायकों का बहुमत अर्जुन सिंह के साथ है। माधवराव सिंधिया पूरे भरोसे में थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है और वे दिल्ली से उड़ान से भोपाल आ गए और 2 दिन तक भोपाल में ही रुके रहे। लेकिन अर्जुन सिंह के दबाव के कारण सिंधिया के स्थान पर मोतीलाल वोरा को मुख्यमंत्री बनाया गया।
इस घटना के 29 साल बाद माधवराव के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए और 72 वर्षीय कमलनाथ देश के मध्य में स्थित सूबे में 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता संभालने जा रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सिंधिया ने कांग्रेस आलाकमान को ध्यान दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का नारा ‘माफ करो महाराज, अपने तो शिवराज’ उनको (सिंधिया) निशाने पर रखकर ही दिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से 9 बार के सांसद नाथ को वरिष्ठता, अनुभव और अधिक विधायकों के समर्थन के आधार पर मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया। ज्योतिरादित्य सिंधिया, आजादी के पहले देश के मध्यभाग ग्वालियर के शाही मराठा सिंधिया राजघराने के वंशज हैं और उनकी दादी दिवंगत राजमाता सिंधिया जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में थीं। माधवराव सिंधिया भी अपनी माता के बाद 1971 में जनसंघ में शामिल हो गए थे और वर्ष 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा लहर के बावजूद मां और पुत्र दोनों अपनी-अपनी सीटों पर विजयी हुए।
वर्ष 1980 में माधवराव सिंधिया इंदिरा गांधी की कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान उनकी मां को जेल में बंद रखा था। माधवराव की बहनें वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे अपनी मां के पदचिह्नों पर चलते हुए बाद में भाजपा में शामिल हुईं। कांग्रेस विधायक दल के नेता कमलनाथ मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में 17 दिसंबर को शपथ लेने जा रहे हैं। (भाषा)
