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चटपटी बाल कविता : जंगल की होली

holi poem
शेर भाई ने हाथी जी के,
माथे में था तिलक लगाया।
 
हाथी ने भी सूंड उठाकर,
ढेरम ढेर ग़ुलाल उड़ाया।
 
तभी हाथ में ले पिचकारी,
एक गिलहरी थी आ धमकी।
 
बंदर ढ़ोल बजता आया।
कौआ लगा बजाने टिमकी।
 
सबने होली खूब मनाई,
हो हल्ला था खूब मचाया।
 
एक लोमड़ी ने सबको ही,
हलवा गरमागरम खिलाया।
 
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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें