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बांके बिहारी मंदिर में सिर्फ जन्माष्टमी पर ही क्यों होती है मंगला आरती, क्या है रहस्य
Mangala aarti at Banke bihari mandir: वृंदावन, प्रेम और भक्ति का वह केंद्र जहां भगवान कृष्ण की हर लीला जीवंत हो उठती है। यहाँ के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में, दर्शन और आरती के समय की अपनी एक अनूठी परंपरा है। यह मंदिर अपनी दिनचर्या में भगवान कृष्ण को एक बच्चे की तरह मानता है और उनकी देखभाल करता है। यही कारण है कि यहाँ साल भर में केवल एक ही दिन, यानी जन्माष्टमी के पावन पर्व पर, मंगला आरती होती है। बाकी दिनों में यहां सुबह इतनी जल्दी आरती नहीं होती। तो आखिर क्या है इस मनमोहक परंपरा के पीछे का रहस्य और मान्यताएँ? आइए, जानते हैं।
बालक स्वरूप के लिए स्नेह और वात्सल्य का भाव
बांके बिहारी मंदिर में भगवान कृष्ण को 'बालक स्वरूप' में पूजा जाता है। इस स्वरूप में उनके प्रति भक्तों का भाव एक बच्चे जैसा होता है। जिस तरह माता-पिता अपने बच्चे को सुबह-सुबह जल्दी नहीं जगाते, उसी तरह यहाँ भी भक्तों का मानना है कि बांके बिहारी जी को सुबह इतनी जल्दी उठाना ठीक नहीं है। यह मान्यता है कि ठाकुर जी को सुबह देर तक विश्राम करने देना चाहिए, ताकि वे पूरे दिन अपने भक्तों को दर्शन देने और उन पर कृपा बरसाने के लिए ऊर्जावान और प्रसन्नचित्त रहें। इसी स्नेह और वात्सल्य भाव के कारण यहां रोज मंगला आरती नहीं होती।
मंदिर में एक और अनूठी परंपरा है, जिसमें हर कुछ मिनट के अंतराल पर बिहारी जी पर से पर्दा हटाया और लगाया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी भक्त लगातार ठाकुर जी के सौंदर्य को देखकर 'भावविभोर' न हो जाए और उसकी आंखों में कोई कमी न आ जाए। यह भक्तों के प्रति ठाकुर जी की एक अनोखी प्रेम लीला है।
निधिवन की रासलीला का रहस्य
एक और प्रचलित मान्यता के अनुसार, बांके बिहारी जी रात के समय वृंदावन के प्रसिद्ध निधिवन में गोपियों के साथ रास रचाने जाते हैं। माना जाता है कि निधिवन में आज भी रात में कृष्ण और गोपियां रासलीला करते हैं। इसी कारण, बिहारी जी रात के तीसरे पहर में ही मंदिर लौटते हैं। क्योंकि बिहारी जी देर रात तक निधिवन में रास रचाकर थक जाते हैं, इसलिए उन्हें सुबह देर तक सोने दिया जाता है। इस मान्यता के कारण भी मंदिर में सुबह जल्दी मंगला आरती नहीं होती।
जन्माष्टमी पर क्यों होता है अपवाद?
पूरे साल भर में जन्माष्टमी ही वह एकमात्र दिन है, जब बांके बिहारी मंदिर के पट सुबह मंगला आरती के लिए खोले जाते हैं। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव है। इस दिन भक्त अपने लाला के जन्म की खुशी में रात भर जागते हैं और उनका जन्मोत्सव मनाते हैं।
चूंकि कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को हुआ था, इसलिए उनका जन्म होते ही मंगला आरती की जाती है। यह एक विशेष अवसर होता है जो साल में सिर्फ एक बार आता है। इस दिन मंगला आरती का उद्देश्य, जन्मोत्सव के बाद सबसे पहले ठाकुर जी का दर्शन करना और उनका स्वागत करना होता है।
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