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ईरान से युद्ध पर अमेरिका 37.5 अरब डॉलर फूंक चुका, 67 अरब डॉलर और चाहिए

US Iran war cost
US Iran war cost: अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध बहुत मंहगा पड़ रहा है। लगभग 37 अरब 50 करोड़ डॉलर अब तक ख़र्च हो चुका है और युद्ध का अंत कहीं दिख नहीं रहा। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इन्हीं दिनों अमेरिकी संसद के उच्च सदन, यानी सीनेट की एक कमेटी के सामने हाथ पसारना और उसके तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
 
हेगसेथ ने अमेरिकी सीनेट की सुनवाई के दौरान पहली बार 37 अरब 50 करोड़ डॉलर का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस कुल ख़र्च में न केवल अब तक का ख़र्च शामिल है, बल्कि 30 सितंबर को ख़त्म होने वाले वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक का अनुमानित ख़र्च भी शामिल है। यह अभी भी साफ़ नहीं है कि वे इस आंकड़े तक कैसे पहुंचे। ALSO READ: ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की HIT लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

पिछले जून में ट्रंप ने 90 अरब डॉलर अतिरिक्त माँगे थे

समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने— इससे पहले पिछले मार्च महीने में— युद्ध के शुरुआती छह दिनों का ख़र्च कम से कम 11.3 अरब डॉलर आंका था। पिछले जून महीने में, ट्रंप ने कांग्रेस (संसद) से लगभग 90 अरब डॉलर अतिरिक्त की मांग की थी, जिसका ज़्यादातर भाग ईरान के साथ संघर्ष से जुड़ा था।
 
हेगसेथ ने अब रक्षा विभाग के लिए 67 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की वकालत की है, ताकि सेना की तैयारी सुनिश्चित की जा सके, पुराने हो चुके उपकरणों को बदला जा सके और गोला-बारूद तथा नए हथियारों में निवेश को बढ़ाया जा सके। यह अतिरिक्त बजट नियमित रक्षा बजट के अलावा एक आपातकालिक फंड के तौर पर मांगा गया है। ALSO READ: अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?

अमेरिकी सांसदों की शिकायत

28 फरवरी 2026 को, अमेरिका और इसराइल के साझे हवाई हमलों की शुरुआत के बाद से ही अमेरिका की रिपब्लिकन और डेमोकैटिक, दोनों ही पार्टियों के सांसद शिकायत करते रहे हैं कि ट्रंप और उनकी टीम उन्हें इस संघर्ष के बारे में जानकारी देने में नाकाम रही है। सीनेट की रक्षा समिति वाली सुनवाई के दौरान, उसकी डेमोकैट महिला सदस्य सीनेटर पैटी मरे ने कहा, "राष्ट्रपति महोदय तो तनाव बढ़ाने और युद्ध अपराधों की धमकी दे रहे हैं, और संकेत दे रहे हैं कि यह "कभी न खत्म होने वाला युद्ध हो सकता है।" 

बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने की धमकियाँ

ट्रंप ने ईरान को बार-बार गंभीर धमकियाँ दी थीं— जिनमें आम नागरिकों के इस्तेमाल वाले बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने की धमकी भी शामिल थी। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) समेत कई पक्षों ने चेतावनी दी थी कि ऐसा करना 'युद्ध अपराध' माना जाएगा। अमेरिकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स' और सीनेट, दोनों में ही ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुत कम बहुमत है; इसलिए, बजट से जुड़े कानूनों को पास कराने के लिए आम तौर पर डेमोक्रैटिक सदस्यों के समर्थन की भी ज़रूरत पड़ती है। डेमोक्रैटिक सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड का कहना था कि ट्रंप प्रशासन से लोगों के नाराज़ होने का कारण यह है कि उनके बयान वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
 
केवल डेमोक्रैट ही नहीं, बल्कि अमेरिकी जनता का एक बड़ा भाग ईरान से युद्ध को लेकर ट्रंप सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना कर रहा है। रक्षा मंत्री हेगसेथ की सीनेट में सुनवाई के दौरान उन्हें युद्ध-विरोधी बैनर दिखाए गए। ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

नई बमबारी शुरू

जून का अंत और जुलाई का आरंभ होते ही, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा भी टिक नहीं पाई। दोनों पक्ष अब हर दिन एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। नई बमबारी शुरू होने के 11वें दिन, एक बार फिर ईरान की राजधानी तेहरान में बम-धमाके होने की ख़बर मिली। इसके जवाब में ईरान, खाड़ी क्षेत्र के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है; हाल ही में, जॉर्डन में कई अमेरिकी सैनिक मारे भी गए।
 
20 जुलाई तक तक ईरान के विरुद्ध युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 18 हो गई, जबकि अब तक 430 सैनिक घायल भी हुए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन के अनुसार, 7 जुलाई के बाद से क़रीब 100 सैनिक घायल हुए हैं, हालांकि ख़बरों के अनुसार उनमें से 96 प्रतिशत सैनिक ड्यूटी पर लौट आए हैं।

अभी कोई अंत दिख नहीं रहा

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर ज़बरदस्त हमले करने की बात कही है। व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका का काम अभी "ख़त्म होने से बहुत दूर" है। ट्रंप के अनुमान के अनुसार, ईरान के पुनर्निर्माण में कम से कम 20 साल लगेंगे।
 
जर्मन टेलिविजन ARD के इस समय तेहरान में स्थित संवाददाता बेन्यामिन वेबर का कहना है कि अमेरिकी हमले 20 जुलाई को एक बार फिर रात भर "पूरे देश" में होते रहे। अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों के एक नए दौर की जानकारी दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि इन हमलों का लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य है— जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। वहाँ व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने से ईरान की क्षमता कमज़ोर होती है।

ईरान पर लगातार नए हमले

जर्मन संवाददाता वेबर के अनुसार, लगभग एक घंटे तक चले इन हमलों में ईरान के सैनिक कमान केंद्र, नौसेना के ठिकाने और वाय़ुसेना की सुविधाओं को निशाना बनाया गया। ईरान पर नए हमलों की यह लगातार ग्यारहवीं रात थी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इर्ना (IRNA) ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी हमलों में बुशहर प्रांत की तीन जगहों को निशाना बनाया गया; इनमें ईरान के एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास का बिजली वितरण केंद्र भी शामिल था।
 
इस समय तो यही लग रहा है कि जान-माल की भारी क्षति उठाने के बावजूद न तो ईरान रत्ती भर भी टस-से-मस होने को तैयार है, और न ट्रंप ही युद्ध रोक कर रणछोड़ कहलाने के मूड में हैं। ईरान मरमिटने पर उतारू दिखता है, जबकि ट्रंप चाहते हैं किसी तरह सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें
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