1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. अंतरराष्ट्रीय
  4. Europe-Fire-Calamity

भीषण गर्मी और जंगल की आग से झुलसता यूरोप, 40 डिग्री के पार हो सकता है तापमान

Europe Fire Calamity

यूरोप के कई देश इस समय अपने यहाँ भीषण गर्मी के कारण जंगलों में लगी आग (दावानल) की रोकथाम करने और आसपास के शहरों एवं बस्तियों को उनसे बचाने में लगे हैं।

दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के अटलांटिक तट पर के जंगलों में लगभग एक सप्ताह से आग धधक रही है। अधिकारी हालांकि स्थिति को कुछ हद तक स्थिर बता रहे हैं, लेकिन यह चिंता भी बनी हुई है कि आग एक बार फिर बेकाबू हो सकती है।
 
फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने, वहाँ के बोर्दो (Bordeaux) शहर की ओर बढ़ रही आग की भयावह घटनाओं को "दूसरे विश्व युद्ध के बाद से सबसे भीषण जंगल की आग" (दावानल) बताया। बोर्दो की उनकी यात्रा के समय आग, शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर रह गई थी।

टूरिस्ट इलाकों को खाली कराया गया

सरकारी अधिकारी बोर्दो के उत्तर-पश्चिम में स्थित कैंपिंग की जगहों, हॉलिडे रिसॉर्ट और मनोरंजन पार्क खाली करवा रहे हैं। इस आदेश से आस-पास के इलाके में लगभग 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं, हालांकि प्रसिद्ध समुद्र तटीय रिसॉर्ट इसमें शामिल नहीं है। मौसम में संभावित परिवर्तन को देखते हुए सावधानी के तौर पर लोगों को हटाया जा रहा है।
 
22 जुलाई के बाद से, आग ने बोर्दो के पास के प्रभावित इलाके में लगभग 42,000 हेक्टेयर (42,000 वर्ग मीटर) ज़मीन को तबाह कर दिया है— अब तक 2,20,000 से ज़्यादा स्थानीय लोगों और टूरिस्टों को वहाँ से हटा कर सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया है।

तापमान फिर से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की आशंका

राष्ट्रपति माक्रों को भरोसा है कि "हम लोगों की सुरक्षा की यह लड़ाई जीतेंगे।" बोर्दो के पास के इलाके में लगभग 2,500 अग्निशमन कर्मी (फायरफाइटर्स) तैनात हैं, उनकी मदद के लिए करीब 1,500 सैनिक भी वहाँ भेजे गए हैं। जर्मनी ने फ्रांस के इस संकटग्रस्त इलाके में सामान आदि पहुँचाने के लिए दो परिवहन हेलीकॉप्टर और एक परिवहन विमान भेजा है।
 
कई अन्य यूरोपीय देश भी संकट की इस घड़ी में फ्रांस की सहायता कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता तपती लू की भावी लहर को लेकर है। मौसम विभाग 'मेटियो-फ़्रांस' के अनुसार, देश के बड़े हिस्सों में तापमान पुन: 40 डिग्री सेल्सियस या अधिक तक पहुँच सकता है। आपातकालीन टीमों ने बोर्दो के पास के जंगल में 100 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी 'फ़ायरब्रेकर' (आग को फैलने से रोकने वाली खाली जगह) बनाई है; इस उपाय का उद्देश्य आग की लपटों को दूसरे इलाकों में फैलने से रोकना है।

आग अभी तक काबू में नहीं

अग्निशमन कर्मी 29 जुलाई तक आग के फैलाव को रोकने में किसी हद तक सफल रहे हैं। इस बीच, पास के बिस्कारोस इलाके में रहने वाले लगभग 15,000 लोग अपने घरों को लौट पाए हैं, हालाँकि आग अभी तक पूरी तरह से काबू में नहीं आई है। एक अधिकारी ने बताया कि इस भीषण आग को पूरी तरह बुझाने में "कई हफ़्ते या महीने भी" लग सकते हैं।
 
आमतौर पर गर्मियों के महीनों और छुट्टियों के मौसम में गिरोंद (Gironde) नाम के इलाके में सबसे ज़्यादा पर्यटक आते हैं, लेकिन यह इलाका भी जंगल की आग से प्रभावित हुआ है। क्षेत्रीय प्रशासन ने छुट्टियां मनाने आए लोगों और यात्रियों से इस इलाके में न जाने की अपील की है और हॉलिडे कैंप, स्काउट कैंप और दिव्यांगों के लिए खास कैंपों का संचालन रोक दिया है। पूरे इलाके में खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई है।

स्पेन में ख़तरा फिर से बढ़ने की आशंका

बढ़ते तापमान से स्पेन के अविला (Ávila) प्रांत में—जो राजधानी मैड्रिड के पश्चिम में है—और मैड्रिड व तोलेदो के आस-पास के इलाकों में हालत फिर से बिगड़ने की आशंका है। इन इलाकों में जंगल की आग से अब तक 80,000 हेक्टेयर (वर्ग मीटर) से ज़्यादा जंगलों और झाड़ियों वाला इलाका जलकर खाक हो चुका है। सावधानी के तौर पर लगभग 90,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा है।
 
मैड्रिड में संकट प्रबंधन समिति की एक बैठक के बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने कहा, "हमें आशा की किरण दिखाई दे रही है।" उन्होंने कहा कि सरकार तब तक सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगी "जब तक आग की आखिरी लपट बुझ न जाए।" 

सांचेज़ सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं

27 जुलाई के बाद से स्पेन में आग को और अधिक फैलने से रोक दिया गया है। आपातकालीन टीमें पूर्वी स्पेन के कास्तेयों प्रांत में जंगल की आग बुझाने में अभी भी जुटी हुई हैं; वहां लगभग 16,000 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
 
स्पेन में भी तापमान पुन: 40 डिग्री सेल्सियस तक या उससे भी अधिक पहुंचने की आशंका है। स्पेन की मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इससे पूरे देश में आग लगने का ख़तरा बहुत ज़्यादा या चरम स्तर तक बढ़ जाएगा। इस अनुमान को देखते हुए, प्रधानमंत्री सांचेज़ ने देश भर के सभी नागरिकों से "बहुत ज़्यादा सावधानी बरतने और हर संभव एहतियात अपनाने" की अपील की है।
 
पड़ोसी देश पुर्तगाल में भी, 27 जुलाई से 1,000 से ज़्यादा अग्निशमन कर्मी तैनात किए गए हैं। देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों के जंगलों में भी आग लग गई है। उत्तर में ब्रागा और ब्रागांका के आस-पास के इलाके तथा मध्य पुर्तगाल में संतारम के पास के इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। ज़्यादा तापमान के कारण, लगभग पूरे देश में आग लगने का ख़तरा अधिकतम या बहुत ही ऊँचे स्तर पर है। मौसम एजेंसी के अनुसार, तटीय इलाकों में यह खतरा थोड़ा कम है।

फ्रांस में पहली बार देखी गई एक दुर्लभ प्रघटना

धुएं और राख के कई किलोमीटर ऊंचे बादल, बिजली का कड़कना और अनिश्चित हवाएं: दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में लगी आग एक ऐसी प्राकृतिक प्रघटना को जन्म दे रही है जो आग बुझाने वालों के साहस की परीक्षा ले रही है।
 
जंगल की आग से पैदा हुआ एक ऐसा तूफ़ान जो खुद ही मौसम तंत्र (वेदर सिस्टम) वाला बेहद गर्म बादल बनाता है— पायरोक्यूम्यलोनिम्बस (pyrocumulonimbus)—उसे फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी जंगलों में लगी विनाशकारी आग के दौरान पहली बार देखा गया है। यह बादल, जिसे क्यूम्यलोनिम्बस फ्लेमजेनिटस (cumulonimbus flammagenitus) भी कहा जाता है, तब बनता है जब ज़मीन के पास की हवा इतनी ज़्यादा गर्म हो जाती है कि
 
वह बहुत तेज़ी से ऊपर उठने लगती है—अपने साथ धुआं, जलवाष्प और राख ले जाती है—और अक्सर कई किलोमीटर ऊपर के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) तक पहुँच जाती है। वहाँ, यह मिश्रण ठंडी हवाओं के संपर्क में आता है और अपना खुद का ऐसा मौसम तंत्र बनाता है, जिसमें आग को और अधिक भड़काने वाली तेज़ हवाएँ चलती हैं। इस बादल से ज़मीन पर अक्सर बिजली भी गिरती है और साथ में गड़गड़ाहट की आवाज़ भी होती है।

NASA उसे "आग उगलने वाले ड्रैगन्स" कहता है

"आग उगलने वाले ड्रैगन्स" को—जैसा कि NASA इन्हें कहता है— पहले मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में ज्वालामुखी पर्वत फटने और बड़े पैमाने पर लगी आग के दौरान देखा गया है। उन इलाकों में यह घटना बार-बार होती है, लेकिन फ्रांस में यह "अभूतपूर्व" है।
 
आमतौर पर इस तरह की 'आग के तूफ़ान' (firestorm) को बुझाना या काबू में करना संभव नहीं होता, क्योंकि आग उगलती हवाएं लगातार अपनी दिशा बदलती रहती हैं।
 
नतीजा यह होता है कि आग हर दिशा में फैलती है और कई जगहों पर आग की लपटें एक साथ उठने लगती हैं, जिससे स्थिति का अंदाज़ा लगाना पूरी तरह से मुश्किल हो जाता है। 

निपटने के दो ही संभावित तरीके

इससे निपटने के केवल दो ही संभावित तरीके ज्ञात हैं। या तो बरसात शुरू हो जाए—हालांकि इसके लिए तीन दिनों तक भारी वर्षा होनी चाहिए—या फिर आग को ऐसी जगह की ओर मोड़ने का कोई तरीका मिले कि वह खुद ही बुझ जाए, जैसा कि बड़वानल वाली आग के समय समुद्रों में होता है।
 
दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में लगी भीषण आग के प्रसंग में कहा जाता है कि कि दमकलकर्मियों के पास पीछे हटने के अलावा कोई चारा नहीं था। "हमें यह मानना होगा कि प्रकृति की यह ताकत हमारे नियंत्रण से बाहर है। यह युद्ध जैसी स्थिति है, जहां हम लगातार आग की चपेट में हैं और हर किसी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचना है।" 
 
ऐसी स्थिति में केवल "धैर्य और संयम" ही काम आता है। आग बुझाने की सीधी कोशिशों के अलावा दमकलकर्मी यही कर सकते हैं कि वे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा करें और जानवरों को आग की लपटों से दूर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचायें। इस बीच स्पेन से लेकर इटली, ग्रीस और तु्र्की तक के कई देश अपने जंगलों में लगी आग से जूझ रहे हैं। नदियां सूख रही हैं और 30 जुलाई के दिन, पश्चिमी यूरोप में आँधी और तूफ़ान आने की भविष्यवाणी आग में घी पड़ने का काम कर सकती है।
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें
अगला लेख
IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?