1. समाचार
  2. वेबदुनिया सिटी
  3. इंदौर
  4. Water crisis in Indore despite the rain; 350 tankers still operating

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

indore water crisis
  • 18 इंच बारिश के बाद भी सूखे हैं इंदौर के बोरवेल
  • हर साल जुलाई में बंद हो जाता है टैंकर से पानी सप्‍लाय
  • इस बार अगस्‍त में भी चल रहे पानी सप्‍लाय के लिए टैंकर
  • अगले साल गर्मी में क्‍या होगा इंदौर का हाल
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में इस बार मानसून सीजन के दौरान चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।

सामान्य तौर पर जुलाई की बारिश के बाद टैंकरों की जरूरत खत्म हो जाती है, लेकिन मौजूदा हालात ने नगर निगम और आम नागरिकों दोनों की नींद उड़ा दी है। बता दें कि कई इलाकों के बोरिंगों में भी भरपूर पानी नहीं आ रहा है और कई मल्टियों में अभी भी पानी की पूर्ति के लिए टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं।

संकट के लिए तैयार रहे इंदौर: यदि सितंबर माह में भरपूर बारिश नहीं होती है तो फिर अगले साल शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में 13 फीट पानी है, जबकि तालाब की क्षमता 19 फीट है। अभी भी तालाब में छह फीट पानी की आवश्यकता है। शहर के बिलावली, पिपलियापाला और पिपलियाहाना तालाब भी आधे खाली हैं। पिपलियाहाना तालाब को भरने के लिए नगर निगम सड़कों पर बहने वाले पानी को पाइपों के जरिए चैनल से तालाब तक लाया, लेकिन कम वर्षा होने के कारण तालाब खाली है।पिछले साल अगस्त माह तक कई तालाब भर चुक थे और अतिरिक्त पानी तालाबों से चैनलों के जरिए बाहर निकाला गया था।

जुलाई तक हो जाता है वाटर रिचार्ज: बता दें कि सामान्य मानसून में जुलाई तक भू-जल स्तर रिचार्ज हो जाता है और बोरवेल अपनी क्षमता के अनुसार पानी देने लगते हैं। इस साल 18 इंच बारिश होने के बाद भी कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं। कई निजी बोरिंग में भी पानी कम आने लगा है।

अब भी चल रहे निजी टैंकर: नगर निगम सीमा के अंतर्गत अभी भी लगभग 350 निजी टैंकर पानी सप्लाई के लिए संचालित हो रहे हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जल वितरण नेटवर्क और प्राकृतिक स्रोत दोनों दबाव में हैं। बारिश के दिनों में लगातार अच्छी मानसूनी गतिविधियों की कमी और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन के कारण यह संकट और गहराया है।

गर्मियों में संकट लेगा विकराल रूप: अगर अगस्त में भी टैंकरों की आवश्यकता पड़ रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी गर्मी के मौसम में जल संकट कितना भीषण हो सकता है, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल भी इंदौर में पानी का संकट गहराया था और निगम को कई टैंकर चलाने पडे थे।

भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की विफलता: यह इस बात का भी प्रमाण है कि शहर में कंक्रीट का दायरा बढ़ने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के सही ढंग से काम न करने के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बहकर निकल जाता है।

वाटर हार्वेस्टिंग ऑडिट में बरतना होगी सख्ती : शहर की बड़ी कॉलोनियों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता की सख्त जांच हो। नर्मदा जल पाइपलाइन नेटवर्क में होने वाले लीकेज को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि पानी की एक-एक बूंद बचाई जा सके। इसके साथ ही शहर के पारंपरिक तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण और सौंदर्यीकरण समय रहते पूरा किया जाए तो पानी के संकट से कुछ हद तक बचा जा सकता है।
अगला लेख
चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास 'BHEEM' प्रोजेक्ट का वीडियो