सम्बंधित जानकारी
- Dhulandi 2021 | होलिका दहन के बाद धुलेंडी क्यों मनाई जाती है?
- होली 2021 पर बन रहे हैं लगभग 500 सालों बाद दुर्लभ योग-संयोग, जानिए क्या है खास
- Holi 2021 : कब है होलाष्टक, होलिका दहन, रंगों की होली और रंगपंचमी
- Holashtak 2021: जानिए होलाष्टक के समय क्या करें और क्या नहीं
- रंग पंचमी के दिन करते हैं ये 10 खास कार्य
Holashtak 2021 : होलाष्टक के दौरान उग्र स्वभाव में रहते हैं ग्रह
होलाष्टक 21- 22 मार्च को लगेगा और यह 28 मार्च तक रहेगा। होलाष्टक के दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
होली आने की पूर्व सूचना होलाष्टक से प्राप्त होती है। इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू हो जाती है। होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं जिसके कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता है। होलाष्टक प्रारंभ होते ही प्राचीन काल में होलिका दहन वाले स्थान की गोबर, गंगाजल आदि से लिपाई की जाती थी। साथ ही वहां पर होलिका का डंडा लगा दिया जाता था जिनमें एक को होलिका और दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है।
होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्य के निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है जिसके कारण कई बार उससे गलत निर्णय भी हो जाते हैं जिसके कारण हानि की आशंका बढ़ जाती है। जिनकी कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा और वृश्चिक राशि के जातक या चंद्र छठे या आठवें भाव में हैं उन्हें इन दिनों अधिक सतर्क रहना चाहिए।
