इस अज्ञानी के गागर में, शब्दों का खजाना है। शब्दों को लिखते-लिखते, जीवन को संवारा है। शब्दों की माला पिरोकर, हार बनाया हूं। उस हार को खुशबू देने, बहार में आया हूं। शब्दों को लिख-लिखकर, जो नाम कमाया हूं। शब्दों ने हमें रहना, सोना सिखाया है। शब्दों...