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होली गीत : फागुन मस्त महीना आयो
सब रंगों से सजी है थाली, सब रंगों से लहलाना सजन, होली में घर को आना सजन। -
नववर्ष 2020 पर कविता : नया साल, नया जोश
नववर्ष पर कविता- दीवारों पर लगेंगे। नए कैलेंडर। पुराने हटाएं जाएंगे। -
New Year 2020 Poem: स्वागत को तैयार रहो तुम
New Year 2020 Poem- स्वागत को तैयार रहो तुम। मै जल्द ही आने वाला हूं। बारह महीने साथ रहूंगा। खुशियां भी लाने वाला हूं। -
Diwali Poem : बढ़ती महंगाई और दिवाली बजट
निकल दिवाला गया पहिले से,अब आएगी दिवाली। चिंता से मन व्याकुल हो गया, खाली पड़ी है थाली। फरमाइश कैसे पूरी होगी, -
बालगीत : छुट्टी के दिन
छुट्टी के दिन गजब के बीते हैं, सौ मीटर की रेस हमीं तो जीते हैं। खेलकूद और शेर के चक्कर में, -
प्रेम गीत : देख रहा जमाना
मैं हूं तेरा दीवाना, तू नहीं करीब मेरे, मैं तेरे आसपास हूं। तेरी तस्वीर को, ले के घूमता हूं... -
मधुमास पर कविता : मधुर-मधुर बहती हवाएं...
मधुर-मधुर बहती हवाएं, छेड़ रहीं संवाद। प्रकृति छटा बिखेर रही, आया है मधुमास। -
रोमांस कविता : छाई हुई तन्हाई
क्यों आंखों में बसे हो तुम, छाई हुई तन्हाई। अभी दूर रहो मुझसे, करने दो हमें पढ़ाई। -
कविता : शब्दों का संसार
इस अज्ञानी के गागर में, शब्दों का खजाना है। शब्दों को लिखते-लिखते, जीवन को संवारा है। -
कविता : प्यारे बच्चे
हम भारत देश के, प्यारे बच्चे। सारे जग से, न्यारे बच्चे। -
प्रेम गीत : वक्त बताएगा...
प्यार के धोखे कैसे डसते हैं, शायद तुमको मालूम होगा। नींद तो मेरी टूट गई है, तेरी नींद का क्या होगा। -
कविता : भारतमाता का पुत्र
मैं भारतमाता का पुत्र प्रतापी, सीमा की रक्षा करता हूं। जो आके टकराता है, अहं चूर भी करता हूं। -
प्रेम गीत: मैं एक प्यासा प्रेमी
मैं प्यासा एक प्रेमी हूं, जो इधर-उधर भटकता हूं। अपनी प्यारी प्रिया के गम में, बिन बरसात तड़पता हूं। -
कविता: थोड़ी शराब पी है...
थोड़ी शराब पी है, समझता नहीं है इतना।, आशिकी की क्या सजा है, सपनों में आज उसने... -
वसंत पंचमी पर कविता : महकै लाग बा उपवन फिर से...
महकै लाग बा उपवन फिर से, चहकै लाग बा माली। मधुमास आगमन सुन के अब तो, हंसय लाग बा क्यारी। -
रोमांस कविता: दिल न लगइयो यार...!
दिल टूट जाता है, बड़ी तकलीफ होती है,जब बंधन छूट जाता है। -
कविता: आने वाला नया साल है...
आने वाला नया साल है, अवगुण को हम छोड़ेंगे। संस्कार भरपूर सुज्जित, सदगुणों से नाता जोड़ेंगे। -
कविता: तब स्कूल को आते हैं...
प्रात:काल उठ पढ़ते हैं बच्चे, फ्रेश होने के बाद नहाते हैं। नित्य नाश्ता करने के बाद, तब स्कूल को आते हैं। -
कविता : कितना सुन्दर लिखते हो
किताबी कीड़ा बन करके, हमने शब्दों को तौला था। महासभा के बीच में, सुन्दर शब्दों को बोला था। -
रोमांस कविता : यौवन के पखवाड़े में...
यौवन के पहले पखवाड़े में, कुछ अजब शरारत सूझ रही। मेरे मन की अभिलाषा खुद, मुझसे प्रश्न यूं पूछ रही।
