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महाशिवरात्रि पर कविता : हे पार्वती पति !

shivratri kavita
हे पार्वती पति !
 
अविनाशी 
व्योमकेश
 
मैं न जानती
 
तेरा पूजन विशेष
 
योग भी ना समझूं  
 
ना आती अर्चना,
 
बस तू ही अंतस में
 
तू ही मानस में
तू ही अंतरंग में
 
तू ही बहिरंग में
 
और मैं रहती 
तेरी आवृत्तियों 
में 
सदा से गुम 
 
और रहूंगी!
लेखक के बारे में
डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र
स्वतंत्र लेखिका, संगीत, काव्य और साहित्य में अभिरुचि.... और पढ़ें
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