1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. hindi poetry

मानवता को सराबोर करती कविता : गूंज...

hindi poetry
एक गूंज उठती है दिल में
और फैल जाती है अनंत तक
उस गूंज में दर्द है सिहरन है
अपनों का धोखा है
गैरों का अपनापन है।
 
वह गूंज अनुगूंजित होकर
कविता में उतरती है
स्वर देती है समाज के सरोकारों को
उठाती है ज्वलंत प्रश्न
पर्यावरण की लाशों के।
 
वह गूंज पहुंच जाती है
गांव के उस चौराहे पर

mgid

जहां दलितों पर प्रश्नचिन्ह है।
 
शहर की उन झोपड़ियों में

aniview

जहां दर्द और दवा निगल रही हैं जवानियां
जहां की बच्चियां कम उम्र में ही
औरत होने का दर्द झेलती हैं
जहां औरतें मशीन की तरह
धूरी पर घूमती बिखर जाती हैं।
 
यह गूंज नहीं रुकती नाद की तरह
बजती है मन के आकाश में
यह संसद से सड़क तक के
चरित्र को आवाज देती है
मानवता की सरहदों से लेकर
मनुष्य के विघटन को गाती है।
 
ये गूंज नहीं पहुंच पाती
जंगल के उन बाशिंदों तक
जिनके सपनों का कोई
सवेरा नहीं होता है
जिस उम्र में पैदा होते हैं
कई साल बाद उसी उम्र
में मर जाते हैं जानवर से।
 
महानगरों के कहकहों की गूंज
विकास के पुल से गुजरती है
गांव के कुम्हार की झोपड़ी तक
जहां एक दीया टिमटिमाता है
तरसता है दिवाली के लिए।
 
गूंज में शब्द नहीं होते
अर्थ भी नहीं होते
होते हैं सिर्फ अहसास
जिंदगी को समझने के।
ये भी पढ़ें
अल्कोहल मसाज के 5 बेहतरीन फायदे