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Atal bihari Vajpayee Poems
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अटल जी को बहुत स्नेह रहा अपने पप्पी से, लिखी थीं उन पर कविता, बबली, लौली कुत्ते दो, कुत्ते नहीं खिलौने दो
आपातकाल के दौरान स्वाधीनता दिवस पर यह कविता रची थी अटल जी ने...
अटल बिहारी वाजपेयी की कविता : आओ फिर से दिया जलाएं
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कवि अटल जी की कविता : रोते-रोते रात सो गई
रोते-रोते रात सो गई
झुकी न अलकें
झपी न पलकें
सुधियों की बारात खो गई।
दर्द पुराना,
मीत न जाना,
बातों में ही प्रात: हो गई।
घुमड़ी बदली,
बूंद न निकली,
बिछुड़न ऐसी व्यथा बो गई।
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गर्मियों में आइस एप्पल खाने के फायदे, जानें क्यों कहलाता है सुपरफ्रूट
Ice Apple Benefits In Summer: गर्मियों का मौसम शरीर से ऊर्जा को तेजी से खींच लेता है। पसीना, थकान, चिड़चिड़ापन, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में शरीर को ठंडक पहुंचाने और हाइड्रेट रखने वाले प्राकृतिक विकल्पों की जरूरत होती है। आइस एप्पल या ताड़गोला (Ice Apple/Tadgola)
आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?
Aamras And Aam Panna: गर्मी का मौसम आते ही आम की बहार छा जाती है। हर गली, हर नुक्कड़ और हर घर में आम का रस और कच्चे आम से बना केरी पना बड़े चाव से पीया जाता है। दोनों ही पेय स्वाद में लाजवाब, ठंडक देने वाले और ऊर्जा से भरपूर होते हैं।
गर्मी के दिनों में फैशन में हैं यह कपड़े, आप भी ट्राय करना ना भूलें
Trending summer outfits : फैब्रिक का मतलब कपड़ा या वस्त्र होता है। गर्मी के दिनों में यह किसी भी प्रकार के मुलायम सामग्री से बने होते हैं, जो खासकर समय के दिनों में सभी पहनना पसंद करते हैं। अत: फैब्रिक शब्द का प्रयोग विभिन्न प्रकार के धागों, जैसे कि सूत, रेशम, या सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़ों को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो हम गर्मी में पहनना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं यहां...
क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?
Is ice cream bad for asthma: गर्मियों का मौसम आते ही आइसक्रीम की याद हर किसी को सताने लगती है। ठंडी-ठंडी, मीठी-मीठी आइसक्रीम किसे पसंद नहीं? लेकिन अगर आपको अस्थमा है, तो क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना आपके लिए सेफ है?
कैंसर शरीर में कैसे फैलता है? जर्मन रिसर्च टीम ने किया नया खुलासा
Cancer Research in Germany: कैंसर शरीर में उस तरह नहीं फैलता, जैसा माना जाता है कैंसर के प्रसंग में मेटास्टेसिस प्राथमिक ट्यूमर से उत्पन्न होने वाले द्वितीयक ट्यूमर (अर्बुद) होते हैं। मेटास्टेसिस (Metastasis) वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा कैंसर कोशिकाएं अपने मूल स्थान से हटकर, रक्तप्रवाह या लसीका प्रणाली के माध्यम से, शरीर के अन्य अंगों में फैलती हैं और वहां नए (secondary) ट्यूमर बनाती हैं।
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23 मार्च शहीदी दिवस: इंकलाब के तीन सूरज: जब फांसी के फंदे भी चूम लिए गए
23 march shaheedi diwas: 95वां शहीद दिवस समारोह: भारतीय इतिहास के कैलेंडर पर 23 मार्च की तारीख केवल एक दिन नहीं, बल्कि शौर्य का वो हस्ताक्षर है जिसे मिटाना नामुमकिन है। सन् 1931 की उस शाम, लाहौर की सेंट्रल जेल ने इतिहास का सबसे साहसी मंजर देखा, जब तीन नौजवान भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु- हँसते हुए मौत को गले लगा रहे थे।
भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण जर्मन पुरस्कार से सम्मानित
जर्मनी के हाइडेलबेर्ग विश्वविद्यालय अस्पताल में कार्यरत भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट (तंत्रिका वैज्ञानिक) डॉ. वरुण वेंकटरामणि को, 2026 के पाउल एर्लिश और लुडविश डार्मश्टेटर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
चहक रहा है चूल्हा
सिलेंडर की कमी के चलते इन दिनों चूल्हा फिर चर्चा में है। वर्षों बाद इस कदर चर्चा में आने से चूल्हा चहक रहा है। तो आइए, हम भी चूल्हे के बारे में कुछ बातें कर लेते हैं।
परिंदे नहीं जानते कि उनकी मौत किसी सरकारी फाइल में दर्ज नहीं होगी
इन परिंदों को नहीं समझ आ रहा है कि आखिर उनके रहबर के घर के सामने इस गली में इंसानों की ये भीड़ क्यों लगी है. ये कैमरे— ये लाइटें क्यों चमक रही हैं— ये तमाम सायरन क्यों बज रहे हैं. वे तो सिर्फ यही जानते हैं कि सुबह हो गई है और कोई छत पर उनके लिए दाना-पानी लेकर आएगा. वे नहीं जानते कि आग क्या होती है— वे नहीं जानते कि लपट क्या होती है— वे नहीं जानते कि मौत क्या होती है— वे नहीं जानते कि किसी सरकारी फाइल में न तो उनकी जिंदगी दर्ज होती है और न ही उनकी मौत.
नव संवत्सरः कृषि, जल और विकास के रोड मैप का संकल्प
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है। इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय कालगणना की गौरवशाली परंपरा उज्जयिनी से प्रारंभ हुई है।