1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. साहित्य आलेख
  4. Hathras case

Trending On Twitter: एक के बाद एक दुष्‍कर्म की घटनाओं से गुस्‍से में सोशल मीडि‍या

Hathras case
हाथरस में पुलि‍स द्वारा रातोंरात जलाई गई दुष्‍कर्म की पीड़ि‍त लड़की की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि आजमगढ़ घट गया और इसके बाद बलरामपुर और इसके बाद बुलंदशहर।

एक दुष्‍कर्म के सवालों के जवाब मिलते नहीं और दूसरे दुष्‍कर्म के सवाल खड़े हो जाते हैं। सिर्फ दुष्‍कर्म ही नहीं, हाथ, पैर तोड़ दिए गए, कमर तोड़ दी गई, जबान काट ली गई और रीढ की हड्डी तोड़ दी गई।

इधर मध्‍यप्रदेश के खरगोन में गैंग रेप और बदनावार में दुष्‍कर्म का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।

इन सबको लेकर सोशल मीडि‍या पर बवाल है। आखि‍र कब तक और किस किस के साथ।

एक के बाद एक होती दुष्‍कर्म की इन घटनाओं की जानकारी जिस किसी के पास पहुंच रही है वो हैरान और व्‍यथि‍त है। सोशल मीडि‍या गुस्‍से में है। फेसबुक पर विरोध में आलेख लिखे जा रहे हैं, ट्व‍िटर पर हैशटैग हाथरस, हैशटैग बलरामपुर, हैशटैग आजमगढ और हैशटैग बुलंदशहर ट्रैंड कर रहा है।

लोग गुस्‍से से भरे पड़े हैं। हजारों लोग इन घटनाओं की आलोचना कर रहे हैं। महिलाएं और लड़कि‍यां अपनी सुरक्षा की बात कर रही हैं।

इसी कड़ी में हाथरस दुष्‍कर्म मामले में विरोध करने पहुंचे राहुल गांधी के साथ पुलिस ने हाथापाई की। इसके बाद यहां हंगामा मचा हुआ है। हाथरस से कुछ ही कि‍लोमीटर दूरी पर यमुना एक्‍सप्रेस वे पर यह सारा घटनाक्रम हुआ है। जिसके बाद देश की राजनीति‍ चरम पर है।

सोशल मीडि‍या में भी उत्‍तर प्रदेश शासन और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडि‍या पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सबसे बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।

कई यूजर्स अपनी प्रति‍क्र‍ियाएं दे रहे हैं। एक यूजर ने ‘बेटी बचाओ’ के नारे के साथ लिखा कि यह नारा है या अब चेतावनी है। नो मर्सी टू रैपिस्‍ट की तख्‍त‍ियां वायरल की जा रही हैं।

हाथरस की दुष्‍कर्म पीड़ि‍ता को रातोंरात जलाकर अंति‍म संस्‍कार कर देने पर भी सोशल मीडि‍या में गुस्‍सा है। इस मामले में सीधे पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। कुल मिलाकर हाल में सोशल मीडि‍या दुष्‍कर्म की घटनाओं से पूरी तरह से आहत है।
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें
अगला लेख
गांधी महज़ सिद्धांत नहीं सरल व्यवहार है...