हिन्दी हम सबकी भाषा है। जन-जन की भाषा है। हिन्दी के लिए देश-विदेश के बड़े-बड़े विद्वानों ने समय-समय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। आइए जानते हैं क्या कहते हैं .....
हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है। - ग्रियर्सन
संस्कृत मां, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है। - डॉ. फादर कामिल बुल्के
जीवन के छोटे से छोटे क्षेत्र में हिन्दी अपना दायित्व निभाने में समर्थ है। - पुरुषोत्तमदास टंडन
हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य को सर्वांगसुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है। - डॉ. राजेंद्रप्रसाद
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। - भारतेंदु हरिश्चंद्र
भाषा के उत्थान में एक भाषा का होना आवश्यक है। इसलिए हिन्दी सबकी साझा भाषा है। - पं. कृ. रंगनाथ पिल्लयार
मैं मानती हूं कि हिन्दी प्रचार से राष्ट्र का ऐक्य जितना बढ़ सकता है वैसा बहुत कम चीजों से बढ़ सकेगा। - लीलावती मुंशी
हिन्दी उर्दू के नाम को दूर कीजिए एक भाषा बनाइए। सबको इसके लिए तैयार कीजिए। - देवी प्रसाद गुप्त