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कैंसर के इलाज में क्रांति है CAR टी-सेल थेरेपी, जानिए कैसे करती है काम
CAR-T cell therapy: CAR टी-सेल थेरेपी कैंसर के इलाज में एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करती है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए आशा की किरण है, जिनके कैंसर का इलाज पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है। CAR टी-सेल थेरेपीऐसे कैंसर में काफी असरदार है, जिसमें ट्रेडिशनल कीमोथेरेपी या रेडियो थेरेपी काम नहीं कर पाती है या कीमोथेरेपी के बाद बीमारी फिर से लौट आती है।
टी सेल थेरेपी एक इम्यूनोथेरेपी है, जो कैंसर के खिलाफ बहुत ही असरदार इलाज साबित हो रहा है। केरल में 47 साल के एक कैंसर पीड़ित को सी आरटी सेल थेरेपी के उपचार से इलाज मिला है। इससे पहले भी दिल्ली के सफदरजंग मे एक महिला का सफल इलाज किया गया था। आइए जानते हैं क्या होती है यह थेरेपी और कैसे करती है इलाज।
CAR टी-सेल थैरेपी कैसे काम करती है?
टी-सेल्स का संग्रह: CAR टी-सेल थेरेपी में, मरीज के रक्त से टी-सेल्स नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को एकत्र किया जाता है।
जेनेटिक इंजीनियरिंग: प्रयोगशाला में, इन टी-सेल्स को आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता है ताकि वे CAR (चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर) नामक एक विशेष रिसेप्टर का उत्पादन कर सकें।
कैंसर कोशिकाओं को पहचानना: CAR रिसेप्टर कैंसर कोशिकाओं पर पाए जाने वाले विशिष्ट एंटीजन को पहचानता है।
कैंसर कोशिकाओं पर हमला: जब CAR टी-सेल्स कैंसर कोशिकाओं को पहचानते हैं, तो वे उन पर हमला करते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं।
मरीज में वापस डालना: संशोधित टी-सेल्स को फिर मरीज के शरीर में वापस डाल दिया जाता है, जहां वे कैंसर कोशिकाओं से लड़ते हैं। इस प्रोसेस को ल्यूकेफेरेसिस कहा जाता है
CAR टी-सेल थेरेपी के फायदे
लक्षित चिकित्सा: CAR टी-सेल थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करती है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान कम होता है।
दीर्घकालिक प्रभाव: CAR टी-सेल्स शरीर में लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, जिससे कैंसर के दोबारा होने का खतरा कम हो जाता है।
अन्य उपचारों के लिए विकल्प: CAR टी-सेल थेरेपी उन मरीजों के लिए एक विकल्प है जिनके कैंसर का इलाज अन्य उपचारों से संभव नहीं है।
स्टडी के अनुसार क्लिनिकल ट्रायल्स में भारतीय मरीजों में यह 73 फीसदी सफल रहा है। एक्सपर्ट क्हके अनुसार यह एक नया और काफी प्रभावी ट्रीटमेंट है। बता दे कि इस इलाज में टी सेल्स कैंसर कोशिकाओं पर हमला करते हैं और इसमें स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने की संभावना बेहद कम होती है। अच्छी बात यह है कि भारत में इसकी शुरुआत हो चुकी है लेकिन अभी काफी लिमिटेड जगह पर ही इससे इलाज किया जा रहा है।
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