सम्बंधित जानकारी
- ईंधन और खर्च बचाने के लिए गुजरात सरकार एक्शन मोड में, आम जनता की सुविधा के लिए दौड़ेंगी 300 नई एसटी बसें
- GUJCET 2026: गुजरात में गुजकेट परीक्षा आयोजित, सूरत में 20 हजार से ज्यादा छात्र होंगे शामिल
- गुजरात सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: गांधीनगर, जामनगर और सुरेंद्रनगर को मिले नए कलेक्टर
- गांधीनगर में भाजपा कोर कमेटी की पहली महत्वपूर्ण बैठक
- सबसे बड़ी लाइब्रेरी के बाद गांधीनगर को नई सौगात: बनेगा अत्याधुनिक क्रिकेट स्टेडियम
गुजरात बोर्ड के छात्रों को जल्द मिलेंगी नए डिजाइन वाली मार्कशीट
GSHSEB New Marksheet Design: गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) ने कक्षा 10 और 12 के परिणाम घोषित कर दिए हैं, लेकिन विद्यार्थियों छात्रों को मूल मार्कशीट मिलने में अभी लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। इस साल बोर्ड ने मार्कशीट के स्वरूप में बड़े बदलाव किए हैं। अब यह मार्कशीट राष्ट्रीय स्तर के सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की तरह आधुनिक और आकर्षक डिजाइन में दिखाई देगी। बोर्ड सचिव आरआर व्यास के अनुसार, मुख्य बदलाव मार्कशीट के आकार, सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड और नाम लिखने के तरीके में किए गए हैं।
मार्कशीट में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब पुराने होलोग्राम के स्थान पर QR कोड का उपयोग किया जाएगा। इसे स्कैन करके छात्र की सभी जानकारी ऑनलाइन सत्यापित की जा सकेगी, जिससे फर्जी मार्कशीट बनाना लगभग असंभव हो जाएगा। पहले इस्तेमाल होने वाली पीली सुरक्षा फिल्म और होलोग्राम को हटाने का निर्णय लिया गया है, जबकि अतीत में विदेशी प्रतिनिधियों ने इस पुरानी प्रणाली की काफी सराहना की थी। ALSO READ: गुजरात में खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर होगा एक्शन
नाम प्रदर्शित करने की पद्धति में भी बदलाव
नाम प्रदर्शित करने की पद्धति में भी ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। अब मार्कशीट में 'सरनेम' पहले नहीं, बल्कि छात्र का अपना नाम पहले लिखा जाएगा। इसके अलावा, छात्र का नाम, पिता का नाम और सरनेम अब अलग-अलग कॉलम या हेडिंग के तहत दर्शाए जाएंगे। यह बदलाव विशेष रूप से उन छात्रों के लिए मददगार होगा जो विदेश में पढ़ाई या नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, ताकि वहां के अधिकारी नाम और उपनाम को आसानी से पहचान सकें।
हालांकि, इन बदलावों के बीच विवाद भी सामने आया है। गांधीनगर बोर्ड द्वारा मार्कशीट और सर्टिफिकेट के लेमिनेशन के लिए जारी किए गए टेंडर नियमों में कथित तौर पर तीन बार बदलाव किए गए। आरोप लग रहे हैं कि एजेंसी की मशीनरी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उचित जांच किए बिना ही उसे योग्य घोषित कर दिया गया है, जिसे लेकर शैक्षणिक जगत में चर्चाएं तेज हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
