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ईद-उल-अजहा, जानें कब, क्यों और कैसे मनाई जाती है?, जानें संदेश
Eid al-Adha festival information: ईद-उल-अजहा, जिसे आमतौर पर बकरीद भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्याग, समर्पण और बलिदान की भावना का प्रतीक है। आइए विस्तार से जानें कि ईद-उल-अजहा कब और क्यों मनाई जाती है:ALSO READ: ईद-उल-अजहा 2025: जानिए तारीख, महत्व और परंपराएं
ईद-उल-अजहा कब मनाई जाती है?
• ईद-उल-अजहा इस्लामिक कैलेंडर के धुल-हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है।
• यह त्योहार ईद-उल-फित्र के लगभग 2 महीने बाद आता है।
• 2025 में ईद-उल-अजहा भारत में चांद देखने के बाद 7 जून (शनिवार) को मनाई जाएगी।
ईद-उल-अजहा कैसे मनाई जाती है?ALSO READ: ईद-उल-अज़हा का चांद नज़र आया, भारत में 7 जून को मनेगी बकरीद
1. ईद की नमाज – सुबह विशेष नमाज़ अदा की जाती है।
2. कुर्बानी (बलिदान) – बकरी, ऊंट, भैंस या भेड़ की कुर्बानी दी जाती है।
3. मांस का वितरण – तीन हिस्सों में बांटा जाता है:
- एक हिस्सा गरीबों को,
- दूसरा रिश्तेदारों को,
- तीसरा खुद के लिए।
4. भाईचारे और मदद का दिन – समाज में समानता और सेवा की भावना को बढ़ावा मिलता है।
ईद-उल-अजहा क्यों मनाई जाती है?
ईद-उल-अजहा का सीधा संबंध पैगंबर इब्राहीम (अलैहि सलाम) की उस घटना से है, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे इस्माइल (अलैहि सलाम) की कुरबानी देने का संकल्प लिया था। लेकिन जैसे ही वे बलिदान देने को तैयार हुए, अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक मेंढ़ा (दुम्बा) भेजा।
इस घटना से हमें यह शिक्षा मिलती है:
• अल्लाह की आज्ञा सर्वोपरि है।
• सच्चा समर्पण और निष्ठा बलिदान से भी बड़ा होता है।
ईद-उल-अजहा का संदेश: 'त्याग वही सच्चा है, जो निस्वार्थ और श्रद्धा से किया जाए।'
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