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Special Report : कोरोना ने कई मान्यताओं को तोड़ डाला जम्मू कश्मीर में, दूसरी बार अमरनाथ यात्रा रद्द करवाने की तैयारी
जम्मू। कोरोना ने जम्मू कश्मीर में भी कई मिथ्यों को तोड़ डाला है। यह लगातार दूसरी बार है कि अगर 150 सालों के ज्ञात इतिहास में पहली बार अमरनाथ यात्रा किसी महामारी के कारण स्थगित कर दी गई तो महामारी के कारण ही 148 सालों से चली आ रही दरबार मूव की परंपरा भी बदली जा चुकी है। पिछले साल चमलियाल मेला भी संपन्न नहीं हो पाया था और इस बार भी इस पर ठीक उसी प्रकार से खतरा मंडरा रहा है जिस तरह से क्षीर भवानी के मेले पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।
हालांकि कई बार पहले भी अमरनाथ यात्रा को खराब मौसम या सुरक्षा हालात के चलते समय से पहले रोकना पड़ा था लेकिन जिस तरह से पिछले साल बिना शुरू हुए ही यात्रा को समाप्त घोषित किया गया था वह इतिहास में पहली बार था। अब दूसरी बार इसे रद्द करने की तैयारी चल रही है।
अभी तक अमरनाथ यात्रा के प्रति यह मिथ्य था कि यह कभी नहीं रूकी है। चाहे आतंकी हमला हो या प्राकृतिक आपदा। सच भी है। ज्ञात 150 सालों के इतिहास के दौरान यह अनवरत रूप से चलती रही है। पर अब कुदरत के चमत्कार ने सब कुछ बदल कर रख दिया।
यही नहीं प्रदेश में पिछले 148 सालों से दरबार मूव अर्थात राजधानी बदले जाने की परंपरा को भी कभी आतंकी हमले या युद्ध की स्थिति हिला नहीं पाई थी। परंतु इस बार कोरोना के कारण प्रशासन ने इसे बदल दिया। यह बदलाव स्थाई है या अस्थाई, यह चर्चा का अलग विषय है। परंतु सच्चाई यही है कि इस परंपरा के लगातार दूसरी बार टूट जाने से कई पक्ष खुश भी हुए हैं।
कोरोना ने चमलियाल मेले की परंपरा को भी तोड़ दिया है। कई सौ सालों से यह मेला चल रहा था। पर कोरोना ने इस पर रोक लगा दी। अबकी बार भी इसके संपन्न होने पर ठीक उसी प्रकार का प्रश्न चिन्ह है जिस तरह से अनंतनाग में होने वाले मेला क्षीर भवानी के आयोजन पर है। लद्दाख में भी दूसरी बार सिंधु मेले को स्थगित कर दिया गया है। जबकि अन्य धार्मिक यात्राओं पर भी लगातार दूसरी बार रोक लगाने की तैयारी चल रही है।
हालांकि कई बार पहले भी अमरनाथ यात्रा को खराब मौसम या सुरक्षा हालात के चलते समय से पहले रोकना पड़ा था लेकिन जिस तरह से पिछले साल बिना शुरू हुए ही यात्रा को समाप्त घोषित किया गया था वह इतिहास में पहली बार था। अब दूसरी बार इसे रद्द करने की तैयारी चल रही है।
अभी तक अमरनाथ यात्रा के प्रति यह मिथ्य था कि यह कभी नहीं रूकी है। चाहे आतंकी हमला हो या प्राकृतिक आपदा। सच भी है। ज्ञात 150 सालों के इतिहास के दौरान यह अनवरत रूप से चलती रही है। पर अब कुदरत के चमत्कार ने सब कुछ बदल कर रख दिया।
कोरोना ने चमलियाल मेले की परंपरा को भी तोड़ दिया है। कई सौ सालों से यह मेला चल रहा था। पर कोरोना ने इस पर रोक लगा दी। अबकी बार भी इसके संपन्न होने पर ठीक उसी प्रकार का प्रश्न चिन्ह है जिस तरह से अनंतनाग में होने वाले मेला क्षीर भवानी के आयोजन पर है। लद्दाख में भी दूसरी बार सिंधु मेले को स्थगित कर दिया गया है। जबकि अन्य धार्मिक यात्राओं पर भी लगातार दूसरी बार रोक लगाने की तैयारी चल रही है।
