अयोध्या राम मंदिर में 500 वर्षों में पहली बार बदला सावन झूलनोत्सव का नियम, जानिए कब झूलेंगे रामलला झूला?
ayodhya ram mandir sawan jhulanotsav: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस बार सावन का झूलनोत्सव बेहद खास और भव्य होने जा रहा है। करीब 498 साल (लगभग 500 वर्ष) के इतिहास में पहली बार रामलला की झूला परंपरा में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक झूलनोत्सव की शुरुआत नाग पंचमी से होती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत रामलला पहली बार सावन शुक्ल तृतीया (15 अगस्त) से झूले पर विराजेंगे। इस बीच, श्रावण मास में अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि देखी गई है।
इस बार झूलनोत्सव में क्या होगा खास?
- शुरुआत : 15 अगस्त की शाम 7 बजे से।
- अवधि : यह उत्सव लगातार 12 दिनों तक चलेगा।
- लाइव प्रसारण : पहली बार देश-विदेश के श्रद्धालु घर बैठे रामलला के झूलनोत्सव का सीधा (Live) प्रसारण देख सकेंगे।
पहली बार निकलेगी रामलला की 'पालकी यात्रा'
- भूतल पर विराजमान रामलला के उत्सव विग्रह को विधि-विधान के साथ पालकी में विराजमान कराया जाएगा।
- यह पालकी यात्रा परिसर में स्थित कुबेर टीला तक जाएगी, जहां भगवान का पूजन-अर्चन कर उन्हें झूला विहार कराया जाएगा।
सांस्कृतिक संध्या और सावन के गीत
- झूलनोत्सव के दौरान रोजाना शाम को राम दरबार में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
- विख्यात कलाकार रामलला को सावन और झूलनोत्सव से जुड़े पारंपरिक गीत सुनाएंगे।
परकोटे के शिव मंदिर में पूरे सावन अनवरत जलाभिषेक
श्रीराम जन्मभूमि परिसर के परकोटे में स्थित शिव मंदिर और कुबेर टीला पर भोले बाबा के जलाभिषेक के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। शिवलिंग के ठीक ऊपर छिद्रयुक्त पात्र लगाया गया है, जिससे पूरे सावन अनवरत जलधारा गिरती रहेगी। यह प्रक्रिया केवल रात्रि में भोले बाबा के शयन के समय रुकगी और सुबह पुनः शुरू होगी।
धर्म समिति सदस्य राजकुमार दास के अनुसार, मंदिर की पूजा और धार्मिक व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए आचार्य इंद्रदेव मिश्र को धार्मिक अनुष्ठानों का व्यवस्थापक बनाया गया है।
अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब
सावन के महीने में रामलला के दर्शन के लिए प्रतिदिन लगभग 1 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए ट्रस्ट ने व्यवस्थाएं और कड़ी कर दी हैं।












