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हिन्दी कविता :बच्चा और युद्ध
चारों तरफ छिड़ी हुई है, जंग/तबाह हो रहे हैं, शहर-दर-शहर मारे जा रहे हैं अनगिनत, बेकसूर नागरिक। घरों में कैद ... -
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कविता : अहिंसा के पुजारी
Mahatma Gandhi Poem अहिंसा के पुजारी गांधी पर कविता- तुम, सिर्फ एक दिन जीने के लिए, क्यों जिए बापू और/ क्यों शहीद हुए? -
महात्मा गांधी पर कविता : क्यों शहीद हुए बापू
क्यों शहीद हुए? तुम्हारे ही देश में-जहां देखा था तुमने रामराज्य का स्वप्न, -
गांधी जयंती पर कविता : बापू से...
तुम, सिर्फ एक दिन जीने के लिए क्यों जिए बापू और/ क्यों शहीद हुए? तुम्हारे ही देश में-जहां देखा था -
कोरोना पर दोहे: करें नमस्ते, मन पर छोड़ें छाप
हाथ मिलाने की जगह,करें नमस्ते आप। -
कविता : नहीं चाहिए चांद
मुझे नहीं चाहिए चांद/और न ही तमन्ना है कि सूरज कैद हो मेरी मुट्ठी में -
वर्षा : एक शब्दचित्र
गली के नुक्कड़ पे बारिश की रिमझिम के बाद उस छोर से आती छोटी सी नदी में छपाक-छपाक करते -
हिन्दी कविता : त्रासदी
इसमें तुम्हारा दोष कतई नहीं है कि तुम आदमियत से हैवानियत की ओर मुड़ते -
कविता : शिल्पकार
तुम, सचमुच महान हो शिल्पकार- तुम्हारे हाथ नहीं दुलारते बच्चों को -
हिन्दी कविता : बदला मौसम
चिड़िया अब नहीं लाती दाना घोंसले में छिपे बच्चों के लिए जो, अब लगने लगे हैं -
हिन्दी कविता : बंदूकें
तुम्हें भले ही भाती हों अपने खेतों में खड़ी बंदूकों की फसल लेकिन - -
हिन्दी कविता : पहाड़ के नाम
तुमने प्रकृति का वरदहस्त पाकर पाया अपना अस्तित्व पहाड़ के रूप में और/ प्रस्तुत किया खुद को अपने स्वभाव की तरह।
