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24 जनवरी बालिका दिवस : हो रामा हमरे घर आ जाए बिटिया
बस एक बार चुप्पी टूट जाए फिर देखना बहुत क्षमता है किशोरी में। वह हंसती है तो चांदनी बिछ जाती है धरती पर। वह उछलती है तो ... -
World Bicycle Day : मैं साइकिल चलाना नहीं सीखूंगी...
’दादाजी, मैं साइकिल चलाना नहीं सीखूंगी।’ दादाजी ने अखबार से चेहरा निकालते हुए पूछा, ’क्यों? गिर पड़ी क्या?’ ... -
कोरोना काल की कहानियां : मजबूरी से निकली रोजगार की राह
तीन साल पहले ही रजनी इस शहर में आई थी। उसके पति मॉल में सिक्यूरिटी आफिसर थे। उसने अपनी बेटी को शहर के बेहतर अंग्रेजी ... -
कोरोना काल की कहानियां : लॉकडाउन ने बदला बहू का नज़रिया
पूना में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनेवाली स्नेहा का शुरू से सपना था, कि शादी के बाद वो सिर्फ पति के साथ रहे। दोनों ... -
हिंदी कहानी : नीम के तने पर जसोदाबाई की ढोलक
धमम् तपड़......धमम् तपड़.... धमम् तपड़... जसोदाबाई नीम तले ढोलक ठोक रही थी। बेसुरा, बेताल। ढोलक की दोनों चाटी पर पूरे हाथ ... -
हे स्वर्णपुरुष ! मैं नित करती हूं तुम्हारा इंतजार
विवस्वान की ऊर्जा धरती को चैतन्य कर देती है। तृण से लेकर वन तक, जीव से लेकर जगत तक, बूंद से लेकर सागर तक, सभी में ऊष्मा ... -
Ayesha Case A Different Angle : आयशा, तुम बखेड़ा क्यों खड़ा कर गई?
आयशा तुमने कहा ,प्यार एकतरफा नहीं होना चाहिए। मैं तो कहती हूं, हर बार एक तरफा ही हो और हर बार उंगलियां खुद की ओर उठी ... -
लोकगंध में पगी कहानी - मेरी बई, बरत और बारता
कहावत तो सात वार नौ त्योहार की है, पर हमारी बई के तो सात वार में नौ बरत आते थे। कभी सोमवार के साथ ग्यारस आ जाती तो कभी ... -
विश्व साइकिल दिवस पर एक यादगार अनुभव
’दादाजी, मैं साइकिल चलाना नहीं सीखूंगी।’ दादाजी ने अखबार से चेहरा निकालते हुए पूछा, ’क्यों? गिर पड़ी क्या?’ -
अमृत जो नर्मदा संग बहता रहा
अमृतलाल वेगड़, एक ऐसी शख्सियत जिसने नर्मदा यात्रा के अपने जुनून को नदी की निर्मल धार की भांति शब्दों में बांधकर हिन्दी ... -
मदर्स डे पर लघुकथा : एक चुटकी प्यार
’मां, पता है आज मैंने आपके जैसा हलवा बनाना सीख लिया।’ बेटे ने चम्मच भर गरमागरम हलवा मुंह में डालते हुए कहा। -
सुनो....कि अब लब आजाद हैं मेरे....
अब मैं कभी सहेलियों के साथ नहीं खेल पाऊंगी, कभी दौड़कर खाने की चीज लेने नहीं जा पाऊंगी, कभी पाठ नहीं पढूंगी और इबारत भी ... -
संक्रांति पर पढ़ें नन्ही चिड़िया की कहानी : प्लीज, हमें बचा लो...
पहचानते है मुझे ? नहीं ?? अरे, मैं नन्ही चिड़िया गुनगुन। यहीं पास ही के पेड़ पर रहती हूं। रोज आती तो हूं तुम्हारे आंगन ... -
रक्षाबंधन पर कहानी : उम्मीद
उत्साह और उम्र का भला क्या संबंध? उत्साह पैदा होते ही उम्र को कहीं पीछे धकेल देता है। उम्र कितनी ही हो जाए, बेटियों का ... -
मां पर मार्मिक कविता : आजा, मां का दिन है न आज....
पापा को पकोड़े पसंद है,भाई को खीर और दादी को मीठी थुली, सब याद था उन्हें, पर उन्हें ...कभी जाना ही नहीं। कोई रंग बताया ... -
प्रेम कहानी : प्रेम भीगा गुलबंद
पीराने पीर की दरगाह पर मन्नत का धागा बांधकर मांगा था तुम्हें, कि निकाह हो तो शौहर के रूप में बस तुम्हें ही पाऊं। नीचे ... -
पतंग से भी तो सीख सकते हैं जीने की कला
जनवरी मध्य की गुनगुनी धूप हो, हाथ में तिल-गुड़ हो और आप खुले में दृष्टि ऊपर की ओर उठाई तो पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों ... -
लघुकथा : उस वक्त पूछा था क्या
उस किशोर का मन नये सुविधापूर्ण घर में भी अस्थिर सा था। ' क्या बनाऊं आज तुम्हारे लिए ?' ' जो मर्जी हो। ... पढ़ें एक ... -
20 नवंबर : अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस
बड़े अक्सर अपने अधिकारों के बारे में बहुत जागरूक रहते हैं। उन्हें अपने सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक सभी अधिकारों की ... -
संजा पर्व विशेष : चली स्कूल
कुछ दिनों पूर्व की बात है। कार्यालय कार्य क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान मैं उस ग्रामीण अंचल में थी। मैं स्कूल परिसर के बाहर ...
