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अनुशासन और चींटी पर कविता
चल-चलकर चींटी ना थकती, करती अनुशासन की भक्ति। खुद से ज्यादा बोझ उठाकर, आसमान को लक्ष्य बनाकर। -
वर्तमान परिस्थितियों पर कविता : आजादी जो हम में थी....
आजादी जो हम में थी, वह मैं में सिमट गई है, अपराधी के कर में भइया, बाजी पलट गई है! कामी, लोभी, लंपट है, सरकार चलाने ... -
हिन्दी कविता : अगर बेटी
अगर बेटी को सुखी देखना चाहते हैं, तो बहू का सम्मान कीजिए। अगर बीवी से प्यार करते हैं, तो बहन को स्वीकार कीजिए। -
कविता : जीएसटी और उसका विरोध
जीएसटी और उसका विरोध सरकार ने जीएसटी लाया, कंपनियों ने मॉल बनाया हमने किसी स्टॉकिस्ट से पूछा! -
कविता : गणित जीवन का
गणित जीवन का जोड़ (+) सदा ऊपर ले जाए एक-एक मिल भवन बनाए -
सरहद के सिपाही की सरकार से अपील
आगाज अमन का बहुत हुआ, अंजाम युद्ध हो जाने दो। हर रोज बिखरकर हम रोएं, हो एकसाथ रो लेने दो। -
हिन्दी कविता : पतझड़ की एक कली...
मैं पतझड़ की एक कली, तुम चाहो तो खिल जाऊं। पर ऐसी मेरी चाह नहीं, माले में गुंथी जाऊं। एक यही बस अभिलाषा, मैं सबको गले ...
