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World bicycle day : पर्यावरण की दोस्त साइकिलें लौट रही हैं
भारत अपनी साइकिल परिवहन व्यवस्था में कुछ जरूरी किंतु मूलभूत सुधार करके आम और खास लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रेरित ... -
थोड़ी-सी बारिश की बड़ी-सी आफत
देश के कई शहरों में बारिश ने कोहराम मचाते हुए सामान्य जनजीवन को बड़ी बुरी तरह से प्रभावित कर रखा है और ये बात सिर्फ किसी ... -
स्मृति शेष : 'जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था'
अकविता की कठिन अराजकता से मोहमुक्त होकर समकालीन हिन्दी कविता में अपनी बेहद खास पहचान बनाने वाले धूमिल और जगूड़ी के ... -
'परमाणु निषेध संधि' से कैसे नष्ट होंगे परमाणु हथियार?
सत्तर बरस में पहली बार संयुक्त राष्ट्र के 122 देशों ने उस वैश्विक संधि पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसमें परमाणु ... -
हर-हर गंगे, नमामि गंगे और गंगा कानून
गंगा सफाई को लेकर एनजीटी अर्थात राष्ट्रीय हरित अधिकरण का एक बेहद ही खास फैसला यह आया है कि गंगा तट से 100 मीटर तक के ... -
विश्व युद्ध से कितनी दूर है दुनिया?
5 जुलाई को ‘ह्रवासोंग-12’ और 28 जुलाई को ‘ह्रवासोंग-14’ नामक आईसीबीएम का उत्तर कोरिया ने सफल परीक्षण करके दुनिया को ... -
भीषण गर्मी का प्रकोप दुनिया को ले डूबेगा
औसत वैश्विक तापमान का रिकॉर्ड रखने की आधुनिक व्यवस्था प्रारंभ किए जाने के बाद से पिछले 137 बरसों में यह मई का महीना ... -
पेरिस जलवायु समझौता और ट्रंप की हठधर्मिता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन रोकने की बराक ओबामा द्वारा जारी की गई नीतियों को रद्द कर देने के ... -
कैसी रहेगी इस बरस बारिश ?
देशभर के अनेकों इलाकों में अप्रैल का महीना गर्मी का रिकॉर्डतोड़ प्रकोप लेकर आया। पिछले सात वर्षों में अप्रैल माह के ... -
किशोरी अमोणकर उर्फ गीत गाया पत्थरों ने
जयपुर अतरौली घराने की गायकी के मर्म और ममत्व की ख़ूबियों-बारीकियों को गहराई से सीखने-समझने में पारंगत होने के बाद इसे ... -
लौट रही हैं साइकिलें
प्रति व्यक्ति मोटर वाहन स्वामित्व तुलनात्मक दृष्टि से ज्यादा होने के बावजूद विकसित देशों में प्रति व्यक्ति साइकिल ... -
पर्यावरण विशेष : लगातार गर्म हो रही है पृथ्वी
इस बार सर्दियां समय से पहले ही लौट गई हैं और बसंत ने अत्यंत ही प्रभावशाली ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना शुरू कर दिया ... -
हिन्दी कविता : आश्चर्य के बुरे दिन
रोशनी थी, कि रोशनी के बुरे दिन थे, रोशनी के दिन, रोशनी के इतने बुरे दिन थे -
हिन्दी कविता : अनेकात्मता
एक पंक्ति की आत्मा में असंख्य आत्माओं की पंक्ति मिले -
कविता : मुझमें मेरा पानी आखिर कब तक?
मेरे सामने एक गिलास रखा है, मेरे सामने रखे गिलास में थोड़ा पानी है, थोड़े पानी की अपनी थोड़ी कहानी है, थोड़े पानी में थोड़ी ...
