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Mon, 2 Nov 2026

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डॉ मधु त्रिवेदी
  • कविता : हिन्दी का जो मान हुआ

    हिन्दी का जो मान हुआ है हर मुख से जब गान हुआ है
  • कविता : देश

    उजालों को सताया जा रहा है, अंधेरों को बसाया जा रहा है। गरीबों की बढ़ी मुसीबत सुखद का, दिया फिर से हवाला जा रहा है। ...
  • कविता : पर्व आजादी का

    आ गया पर्व आजादी का, एकजुट ध्वज बनाने लगे। शान इसकी रहेगी सदा, हाथ दुश्मन न जाने लगे। भूल जाए न हम बात यह,
  • लघुकथा : परित्यक्ता

    जुम्मे-जुम्मे उसने बारह बसंत ही देखे थे कि पति ने परस्त्री के प्रेम-जाल में फंसकर उसे त्याग दिया। उसका नाम उमा था। अब ...
  • हिन्दी कविता : गीतिका

    थाह दिल की जो नापता होगा, रोज गोता वो मारता होगा। देख मौका छुपे चला आता, प्रीत का बीज रोपता होगा। आज दिलदार जो बना ...
  • दुर्गा मां पर हि‍न्दी कविता

    यहां पर रखी मां हटानी नहीं थी झूठी भक्ति उसकी दिखानी नहीं थी, चली आ रही शक्ति नवरात्रि में जब जला ज्योति की अब मनाही ...
  • हिन्दी गजल : मां की भक्ति...

    यहां पर रखी मां हटानी नहीं थी, झूठी भक्ति उसकी दिखानी नहीं थी। चली आ रही शक्ति नवरात्रि में जब, जला ज्योति की अब मनाही ...
  • कविता : लाज अपने देश की सबको बचाना है...

    लाज अपने देश की सबको बचाना है, दुश्मनों के आज मिल छक्के छुड़ाना है। हर बार मिलकर मनाते पर्व गणतंत्र का, इसलिए अब ...
  • कविता : लड़ाई आज लड़ना है...

    जमाकर पैर रखना राह कंकड़ों से संभलना है, अकेले जिंदगी की इस डगर पर आज बढ़ना है। बड़े ही लाड़ से जो बेटियां पलतीं पिता ...
  • हिन्दी कविता : अफसोस

    देख आज के हालात सिर पकड़ बैठ जाता हूं सब ओर लाचार बेचारी दीनता हीनता है गरीबी और बेबसी है फिर अफसोस क्यों ना हो
  • कविता : मैं नहीं शब्द शिल्पी

    मैं नहीं कोई शब्द शिल्पी जो शब्दों की ग्रंथमाला गूथूं लिख साहित्य की विविध विधाएं गद्यकार कहानीकार मुक्ततकार
  • दिवाली पर कविता : हे मां

    हे मां सीते, विनती है मेरी, घर दीवाली पर आ जाना, राम लखन बजरंगी सहित, जन-जन के उर बस जाना
  • हिन्दी कविता : रूह

    रूह से जब अलग हो जाएगा, कैसे फिर इंसान रह जाएगा, छोड़ कर यह जहां चला जाएगा, रोता बिलखता छोड़ जाएगा
  • हिन्दी कविता : विधुर बाप

    विधुर बाप निर्बल, असहाय, बेचारा-सा होता है, है अगर छोटी-छोटी गुड़िया तो, किस्मत का मारा होता है
  • लघुकथा : भोले-भक्त

    बचपन में मां जब देवी-देवताओं की कहानियां सुनाया करती थीं, कमरे की दीवार पर जो भोले की तस्वीर टंगी थी, उसमें उस ...
  • दि‍वाली पर कविता : मन से मन का दीप जलाओ

    मन से मन का दीप जलाओ, जगमग-जगमग दि‍वाली मनाओ, धनियों के घर बंदनवार सजती, निर्धन के घर लक्ष्मी न ठहरती, मन से मन का दीप ...
  • लघुकथा : बारिश वाली रात

    वि को फिर वही रात याद आ गयी। मूसलाधार बरसात हो रही थी और सांझ ने यह कहते हुए "आओ मेरे पास, बहुत भीग गए हो, कुछ ताप दूं ...
  • असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा

    आज हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और अन्याय रूपी अंधकार को देखकर मन में हमेशा उस उजाले को पाने की चाह रहती है, जो इस अंधकार को ...
  • गांंधी जयंती विशेष : भारतभूमि के लाल

    जाया भारतभूमि ने दो लालों को, वो गांधी और लाल बहादुर कहलाए, बन अलौकिक अनुपम विभूति, भारत और विश्व की शान कहलाए
  • जन्माष्टमी पर्व की प्रासंगिकता

    किसी भी वस्तु, तथ्य या बात की प्रासंगिकता इस बात पर निर्भर करती है कि तत्कालीन परिस्थितियों में वह बात, तथ्य या वस्तु ...

Budh Nakshatra Gochar 2026: दिवाली से पहले बुध का बड़ा बदलाव, 5 राशियों को मिल सकता है धन लाभ

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