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Last Updated : शुक्रवार, 1 मई 2026 (18:33 IST)

ग्रहों का नक्षत्र गोचर काल क्या है? जानिए इसकी अवधि और प्रभाव

The image depicts all the planets—including Jupiter and Saturn—set against a backdrop of the zodiac; below, a person is shown meditating. The caption reads:
Planetary and Stellar Transits: ज्योतिष शास्त्र के गणित के अनुसार, एक नक्षत्र का एक राशि में रहने का समय बहुत ही व्यवस्थित है। इसे समझने के लिए हमें राशि चक्र और नक्षत्रों के विभाजन को देखना होगा। आकाशमंडल के 360 डिग्री को 12 भागों में विभाजत किया गया है। इस विभाजन में प्रत्येक 30 डिग्री को एक नाम दिया गया है। यही काल्पनिक मान राशियों के नाम है। इसमें भ्रमण करने वाले या स्थिति नक्षत्र ही सत्य है राशियां नहीं। राशियां तो गणित का एक हिस्सा है।
 

1. गणितीय गणना (Mathematical Calculation)

कुल राशियाँ: 12
कुल नक्षत्र: 27
एक राशि का विस्तार: 30° (डिग्री)
एक नक्षत्र का विस्तार: 13° 20' (13 डिग्री 20 मिनट)
एक राशि में कितने नक्षत्र: चूँकि 27 नक्षत्रों को 12 राशियों में बराबर बाँटा जाता है, इसलिए एक राशि में कुल 2.25 (सवा दो) नक्षत्र आते हैं।
 

2. 27 नक्षत्रों के क्रमवार नाम:

  1. अश्विनी (Ashwini)
  2. भरणी (Bharani)
  3. कृत्तिका (Krittika)
  4. रोहिणी (Rohini)
  5. मृगशिरा (Mrigashira)
  6. आर्द्रा (Ardra)
  7. पुनर्वसु (Punarvasu)
  8. पुष्य (Pushya)
  9. आश्लेषा (Ashlesha)
  10. मघा (Magha)
  11. पूर्वा फाल्गुनी (Purva Phalguni)
  12. उत्तरा फाल्गुनी (Uttara Phalguni)
  13. हस्त (Hasta)
  14. चित्रा (Chitra)
  15. स्वाति (Swati)
  16. विशाखा (Vishakha)
  17. अनुराधा (Anuradha)
  18. ज्येष्ठा (Jyeshtha)
  19. मूल (Mula)
  20. पूर्वाषाढ़ा (Purvashada)
  21. उत्तराषाढ़ा (Uttarashada)
  22. श्रवण (Shravana)
  23. धनिष्ठा (Dhanishta)
  24. शतभिषा (Shatabhisha)
  25. पूर्वाभाद्रपद (Purva Bhadrapada)
  26. उत्तराभाद्रपद (Uttara Bhadrapada)
  27. रेवती (Revati)
विशेष तथ्य: इन 27 नक्षत्रों के अलावा एक 28वां नक्षत्र भी माना जाता है जिसे 'अभिजीत' कहते हैं। इसे उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के बीच का समय माना जाता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से शुभ मुहूर्त निकालने के लिए किया जाता है।

3. चरणों का विभाजन (The Concept of 'Charan')

हर नक्षत्र के 4 चरण (पद) होते हैं।
एक राशि में नक्षत्रों के कुल 9 चरण समाहित होते हैं।
गणित: 2.25 नक्षत्र x  4 चरण = 9 चरण।
 

4. नक्षत्र का राशि में 'समय' (Duration)

नक्षत्र का राशि में रहने का "समय" इस बात पर निर्भर करता है कि हम गोचर (Transit) की बात कर रहे हैं या आकाशीय विस्तार की:
स्थिर विस्तार: आकाश मंडल में, एक नक्षत्र का एक हिस्सा (या पूरा नक्षत्र) एक राशि में स्थायी रूप से रहता है। उदाहरण के लिए, 'अश्विनी' नक्षत्र हमेशा 'मेष' राशि में ही रहेगा।
ग्रहों के गोचर के अनुसार: जब कोई ग्रह (जैसे चंद्रमा) यात्रा करता है, तो वह एक नक्षत्र को पार करने में एक निश्चित समय लेता है।
 

5. ग्रहों की नक्षत्र गोचर अवधि (Approximate Time)

चंद्रमा: लगभग 1 दिन (24 घंटे), सबसे तेज गति वाला ग्रह।
बुध: लगभग 8 से 9 दिन, इसकी गति बदलती रहती है (वक्री होने पर ज्यादा)।
शुक्र: लगभग 10 से 12 दिन, सौंदर्य और सुख का कारक।
सूर्य: लगभग 13.5 दिन, हर महीने नक्षत्र बदलता है।
मंगल: लगभग 20 से 22 दिन, ऊर्जा और साहस का संचार।
गुरु (बृहस्पति): लगभग 160 दिन (5.3 महीने),एक राशि में 13 महीने रहता है।
राहु: लगभग 8 महीने (240 दिन), हमेशा उल्टी चाल (वक्री) चलता है।
केतु: लगभग 8 महीने (240 दिन), यह भी हमेशा वक्री चलता है।
शनि: लगभग 13 महीने (1.1 वर्ष), सबसे धीमी गति वाला ग्रह।
 

6. इसे याद रखने का आसान तरीका:

फास्ट ट्रैक ग्रह: चंद्रमा, बुध, शुक्र और सूर्य (ये दिनों में नक्षत्र बदलते हैं)।
मिडल ट्रैक ग्रह: मंगल (लगभग 3 हफ्ते)।
स्लो ट्रैक ग्रह: गुरु, राहु, केतु और शनि (ये महीनों में नक्षत्र बदलते हैं)।
विशेष बात: जब कोई ग्रह 'वक्री' (Retrograde) होता है, तो वह एक ही नक्षत्र में सामान्य से अधिक समय तक रुक सकता है क्योंकि पृथ्वी से देखने पर वह पीछे की ओर चलता हुआ या स्थिर प्रतीत होता है।
क्या आप 2026 में होने वाले किसी खास ग्रह के नक्षत्र परिवर्तन के बारे में जानना चाहते हैं?

7. नक्षत्र में ग्रह गोचर का प्रभाव:

1. केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा, मूल)
प्रभाव: यहाँ ग्रह अध्यात्म, मोक्ष और अचानक बदलाव की ओर ले जाते हैं। यह अलगाववादी ऊर्जा देते हैं।
 
2. शुक्र के नक्षत्र (भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा)
प्रभाव: यहाँ स्थित ग्रह कला, सौंदर्य, सुख-सुविधा और प्रेम के प्रति आकर्षण पैदा करते हैं। व्यक्ति विलासी हो सकता है।
 
3. सूर्य के नक्षत्र (कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा)
प्रभाव: यहाँ ग्रह तेज, अनुशासन, राजनीति और नेतृत्व शक्ति देते हैं। अहंकार (Ego) की वृद्धि भी हो सकती है।
 
4. चंद्रमा के नक्षत्र (रोहिणी, हस्त, श्रवण)
प्रभाव: यहाँ ग्रह भावुकता, मानसिक शांति, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को बढ़ाते हैं। मन चंचल रहता है।
 
5. मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा)
प्रभाव: यहाँ ग्रह ऊर्जा, साहस, तकनीकी कौशल और गुस्सा देते हैं। व्यक्ति बहुत प्रतिस्पर्धी (Competitive) हो जाता है।
 
6. राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा)
प्रभाव: यहाँ ग्रह भ्रम, शोध (Research), चालाकी और लीक से हटकर (Out of box) सोचने की क्षमता देते हैं। यह अचानक बड़ी सफलता या गिरावट का कारक है।
 
7. गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद)
प्रभाव: यहाँ ग्रह ज्ञान, धर्म, न्याय और विस्तार (Expansion) देते हैं। व्यक्ति को समाज में सम्मान और सलाह देने की शक्ति मिलती है।
 
8. शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद)
प्रभाव: यहाँ ग्रह धैर्य, कठिन परिश्रम, सेवा भाव और संघर्ष के बाद सफलता देते हैं। यह कर्म प्रधान स्थिति है।
 
9. बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती)
प्रभाव: यहाँ ग्रह बुद्धि, व्यापार, गणित और संवाद कला (Communication) को मजबूत करते हैं।

एक सरल सूत्र (Thumb Rule):
यदि कोई ग्रह अपने मित्र ग्रह के नक्षत्र में है (जैसे सूर्य, मंगल के नक्षत्र में), तो वह सकारात्मक फल देगा।
यदि ग्रह अपने शत्रु ग्रह के नक्षत्र में है (जैसे शनि, सूर्य के नक्षत्र में), तो वह संघर्ष और बाधाएं पैदा करेगा।
स्व-नक्षत्र: यदि ग्रह अपने ही नक्षत्र में है, तो वह बहुत शक्तिशाली हो जाता है।

8. वर्तमान ग्रह गोचर:

वर्तमान में सूर्य 11 मई तक भरणी में, मंगल 11 मई तक रेवती में, बुध 7 मई तक अश्‍विनी में, गुरु 18 जून तक पुष्य में, शनि 8 मई तक रोहिणी में, राहु 1 दिसंबर तक धनिष्ठा में और केतु मघा नक्ष‍त्र में रहेगा।

 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें