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16 नवंबर को होगी वृश्चिक संक्रांति, जानिए महत्व
Vrishchik sankranti 2021 : सूर्य ग्रह ( Surya grah ka rashi parivartan 2021 ) के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर होगा। सूर्य अपनी नीच राशि से निकलर 16 नवंबर, 2021 को 12:49 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा।
1. हर संक्रांति पर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है जिससे सूर्य दोष और पितृ दोष समाप्त होता है।
2. संक्रांति के दिन दान पुण्य का खास महत्व होता है। इसलिए इस दिन गरीब लोगों को भोजन, वस्त्र आदि दान करना चाहिए।
3. संक्रांति के दिन तीर्थों में स्नान का भी खास महत्व होता है। संक्रांति, ग्रहण, पूर्णिमा और अमावस्या जैसे दिनों पर गंगा स्नान को महापुण्यदायक माना गया है। ऐसा करने पर व्यक्ति को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। देवीपुराण में यह कहा गया है- जो व्यक्ति संक्रांति के पावन दिन पर भी स्नान नहीं करता वह सात जन्मों तक बीमार और निर्धन रहता है।
4. इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और पितृ दोष समाप्त होता है।
5. मान्यता के अनुसार वृश्चिक संक्रांति के दिन गाय दान करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
6. संक्रांति का सम्बन्ध कृषि, प्रकृति और ऋतु परिवर्तन से भी है। ऋतु परिवर्तन और जलवायु में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव इनकी स्थिति के अनुसार होता है।
