Phulera Dooj Ke Upay: फुलैरा दूज फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला अत्यंत शुभ दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला फुलैरा दूज शुभ और आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र- वृंदावन, मथुरा और बरसाना में बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से वृंदावन और मथुरा में राधा-कृष्ण के साथ फूलों की होली खेली जाती है।
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फुलैरा दूज को अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना विशेष मुहूर्त के भी विवाह, नया व्यापार, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, या अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। यह पर्व प्रेम, समर्पण, आनंद और आध्यात्मिक उत्साह का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन किए गए सरल उपाय शीघ्र फल देते हैं।
राधा-कृष्ण को पुष्प अर्पित करें
'ॐ राधा कृष्णाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप
विवाह या नए कार्य की शुरुआत
गरीबों को मिठाई या वस्त्र दान
फूलों की होली (प्रतीकात्मक) खेलें
प्रेम विवाह के लिए
वैवाहिक सुख के लिए
फुलैरा दूज- FAQs
यहां फुलैरा दूज के 7 प्रभावी उपाय दिए गए हैं:
1. राधा-कृष्ण को पुष्प अर्पित करें
घर के मंदिर में या किसी कृष्ण मंदिर में जाकर राधा-कृष्ण को सुगंधित फूल अर्पित करें।
विशेष रूप से गुलाब या गेंदे के फूल चढ़ाएं।
फल: दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।
2️. 'ॐ राधा कृष्णाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप
प्रातः स्नान के बाद शांत मन से इस मंत्र का 108 बार जाप करें। साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
फल: मानसिक शांति, रिश्तों में सुधार और मनोकामना पूर्ति।
3️. विवाह या नए कार्य की शुरुआत
फुलैरा दूज को बिना विशेष मुहूर्त के भी शुभ माना जाता है। सगाई, विवाह तय करना, नया व्यापार शुरू करना या नई खरीदारी करना मंगलकारी होता है।
फल: कार्य में सफलता और बाधा निवारण।
4️. गरीबों को मिठाई या वस्त्र दान
इस दिन असहाय, गरीबों को माखन-मिश्री, मिठाई या वस्त्र दान करें।
फल: आर्थिक स्थिति में सुधार और घर में समृद्धि का वास।
5️. फूलों की होली (प्रतीकात्मक) खेलें
घर में परिवार के साथ हल्के फूलों से होली खेलें या मंदिर में पुष्प वर्षा में शामिल हों।
ब्रज में यह उत्सव विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर में प्रसिद्ध है।
फल: घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
6. प्रेम विवाह के लिए
यदि विवाह में अड़चन आ रही है, तो इस दिन राधा-कृष्ण को पीले फूल चढ़ाएं और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भगवान को अर्पित फूल ताजे और सुगंधित हों।
7. वैवाहिक सुख के लिए
फुलरिया दूज के दिन इस खास अवसर पर पति-पत्नी मिलकर राधा-कृष्ण को गुलाब के फूलों की माला पहनाएं। इस दिन क्रोध और कटु वचन से बचकर रहें, तथा विशेष सावधानी बरतें।
फुलैरा दूज- FAQs
1. क्या फुलैरा दूज को अबूझ मुहूर्त माना जाता है?
हां, इसे 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। इस दिन शादी, सगाई या अन्य शुभ कार्य बिना पंचांग देखे भी किए जा सकते हैं।
2. फुलैरा दूज और होली का क्या संबंध है?
यह पर्व होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। ब्रज क्षेत्र में फूलों की होली से रंगों की होली की शुरुआत होती है।
3. फुलैरा दूज पर कौन से मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं?
बांके बिहारी मंदिर में इस दिन विशेष फूलों की होली का आयोजन होता है, जिसे देखने दूर-दूर से भक्त आते हैं।
4. फुलैरा दूज कब मनाई जाती है?
यह फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह तिथि हर वर्ष फरवरी या मार्च में पड़ती है।
5. फुलैरा दूज का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
ब्रज संस्कृति में यह पर्व राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव है और लोक परंपराओं, संगीत और नृत्य के माध्यम से मनाया जाता है।
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