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वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने के 10 अचूक उपाय, नहीं होगा पति पत्नी के बीच कलेश
vaivahik jivan ke upay : यदि आपकी कुंडली का सप्तम भाव और सप्तेमेष खराब है तो वैवाहिक जीवन में कई तरह की समस्याओं का जन्म होता है। यदि आप चाहते हैं एक सुखी वैवाहिक जीवन तो हमारे बताए उपाय करें और निश्चिंत हो जाएं।
ज्योतिष के उपाय :-
1. पुरुष शुक्रवार के दिन किसी कन्या को सफेद रंग की मिठाई खिलाएं और शुक्रवार का व्रत रखें।
2. महिलाएं गुरुवार के दिन व्रत रखकर पीली वस्तुओं का मंदिर में दान करें।
3. यदि बृहस्पति के कारण समस्या है तो मंदिर में पीले रंग की खाने की चीजें दान करें।
4. मंगल के कारण समस्या है तो मंगलवार के दिन गुड़ और मसूर की दाल दान करें।
5. वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए महिलाएं पीले रंग की चूडियां या सोने की चूड़ी पहनें।
6. सूर्य के कारण से परेशानी है तो गरीबों और जरूरतमंद लोगों को गेहूं और गुड़ का दान करें।
7. चंद्र के कारण समस्या है शिव पार्वती की पूजा करें और गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करें। साथ ही चंद्र की वस्तुएं दान करें या चांदी का कोई आभूषण पहनें।
8. पत्नी को बुधवार के दिन दोपहर 12 से 3 बजे तक मौन धारण करके रहना चाहिए।
9. पत्नी को रात में सोते समय पति के सिरहाने सिंदूर रख देना चाहिए। दूसरे दिन पति उस सिंदूर को बाहर कहीं ले जाकर गिरा दें।
10. सप्तम भाव और सप्तमेष बिगड़ा है तो ज्योतिष की सलाह से उसका उपाय करें।
वास्तु के उपाय :-
- घर के ईशन, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य कोण को सुधारें।
- शयन कक्ष में हंसों के जोड़े का सुंदर-सा चित्र लगाएं या उचित स्थान पर श्रीराधा कृष्ण के चित्र लगाएं।
- मुख्य शयन कक्ष, जिसे मास्टर बेडरूम भी कहा जाता हें, घर के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) की ओर होना चाहिए।
- शयन कक्ष में सोते समय हमेशा सिर दीवार से सटाकर सोना चाहिए। पैर दक्षिण और पूर्व दिशा में करके नहीं सोना चाहिए।
- शयनकक्ष में टूटा पलंग नहीं होना चाहिए। पलंग का आकार यथासंभव चौकोर रखना चाहिए।
- पलंग की स्थापना छत के बीम के नीचे नहीं होनी चाहिए।
- शयन कक्ष के दरवाजे के सामने पलंग न लगाएं। लकड़ी से बना पलंग श्रेष्ठ रहता है।
- डबलबेड के गद्दे दो हिस्सों में न हो। यानी गद्दा एक ही होना चाहिए, वह बीच में विभाजित नहीं होना चाहिए।
सप्तम भाव और सप्तमेष : सप्तम में मंगल या शनि अशुभ होकर बैठा हो। सप्तमेश के छठे या आठवें भाव में होने पर किसी क्रूर ग्रह की दृष्टि पड़ रही हो या छठे आठवें भाव के स्वामी ग्रह का सातवें भाव में सप्तमेश के साथ होना वैवाहिक जीवन में संकट खड़े करता है। लड़के की कुंडली में प्रथम और सप्तम भाव में मंगल और शनि की आपसी दृष्टि होने और लड़की की कुंडली में पांचवें एवं ग्यारहवें भाव में शनि और मंगल की आपसी दृष्टि होने पर भी वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां पैदा होती है। मंगल और शनि दोनों की सातवें या आठवें भाव पर दृष्टि पड़ रही हो, तो भी खतरा रहता है।
