गुरुवार, 15 जनवरी 2026
  1. धर्म-संसार
  2. ज्योतिष
  3. ज्योतिष आलेख
  4. hindu new year raudra samvatsara 2083
Written By WD Feature Desk
Last Modified: बुधवार, 14 जनवरी 2026 (12:28 IST)

हिंदू नववर्ष पर प्रारंभ हो रहा है रौद्र संवत्सर, 5 बातों को लेकर रहे सावधान

rudra samvatsar 2083, हिंदू नववर्ष, रौद्र संवत्सर
Hindu New Year 2083: हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इस वर्ष 'रौद्र' नामक संवत्सर प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में 'रौद्र' नाम के संवत्सर को थोड़ा कठोर और उग्र माना जाता है, क्योंकि इसके स्वामी स्वयं भगवान शिव का रुद्र रूप हैं। यदि आप इस नए संवत्सर में सुख-शांति चाहते हैं, तो इन 5 बातों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
 
वर्ष 2026 में बृहस्पति (गुरु) का गोचर सबसे अधिक निर्णायक होने वाला है। दूसरी ओर मंगल का मकर राशि में प्रवेश और शनि की वक्री चाल एक 'महादंगल' की ओर इशारा कर रही है। मकर से मेष राशि तक शनि के गोचर काल में न्याय का दंड चल रहा है। ऐसे में वर्ष 2026 में असली चुनौती 19 मार्च 2026 से शुरू होगी, जब 'रौद्र नामक संवत्सर' का उदय होगा। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समय अपने साथ भीषण विनाश और नरसंहार लेकर आ सकता है। ऐसे में 5 बातों का विशेष ध्यान रखें।
 
1. वाणी और क्रोध पर नियंत्रण: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, 'रौद्र' संवत्सर में लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध की अधिकता देखी जा सकती है। बिना सोचे-समझे न बोलें। कड़वे वचन कहने से बचें, अन्यथा पारिवारिक कलह और रिश्तों में दरार आ सकती है। यदि आपकी यह आदत घर के बाहर भी है तो कार्यस्थल या अन्य जगहों पर आप परेशानी में पड़ सकते हैं।
 
2. स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस काल में रक्त संबंधी विकार, पित्त दोष और संक्रामक रोगों का प्रभाव बढ़ सकता है। अपने खान-पान को शुद्ध रखें और नियमित व्यायाम करें। मौसमी बीमारियों को हल्के में न लें और योग का सहारा लें। बाहर के खाने में स्ट्रीट फूड, जंग फूड, फ्रॉजन फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचकर रहें। पानी की शुद्धता की जांच करें।
 
3. आर्थिक जोखिम से बचाव: संवत्सर के उग्र स्वभाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है। अनावश्यक खर्च और बड़े निवेश में जोखिम हो सकता है। धन का संचय करें। सट्टा बाजार या बिना पूरी जानकारी के किसी भी बड़े वित्तीय प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें। बचत पर ध्यान दें।
 
4. प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं से बचाव: रौद्र संवत्सर में प्राकृतिक उथल-पुथल जैसे भारी वर्षा, आंधी-तूफान या आगजनी की घटनाएं अधिक होने की संभावना रहती है। यात्रा के दौरान सावधानी बरतें और वाहन धीमी गति से चलाएं। घर में अग्नि और बिजली के उपकरणों का रखरखाव सही रखें।
 
5. सामाजिक और विवादित मुद्दों से दूरी: इस वर्ष जनमानस में असंतोष की भावना बढ़ सकती है, जिससे सामाजिक वैमनस्य, जातिवाद, वर्ग संघर्ष भी बढ़ सकता है या कई तरह के कानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाए जाने के कारण भी समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए अपनी व्यवहार में संयम रखें और लोगों से मिलते वक्त सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्यों या कोर्ट-कचहरी के मामलों से बचें। दूसरों के विवादों में पड़ने के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें।
 
उपाय: इस संवत्सर के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव, माता दुर्गा, श्रीराम, कृष्‍ण या हनुमान जी की भक्ति एवं आराधना करना अत्यंत फलदायी होता है।
ये भी पढ़ें
गुप्त नवरात्रि कब से हो रही है प्रारंभ, जानिए इसका महत्व और 3 रहस्यमयी बातें