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Last Updated : मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 (19:18 IST)

Samrat Choudhary : 9 साल में ही सम्राट चौधरी कैसे बने मोदी-शाह की पसंद, मिला RSS का साथ

Samrat Choudhary Bihar CM
बिहार में नीतीश कुमार के युग का अंत हो गया। नीतीश कुमार ने राज्यसभा का सांसद बनने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री होंगे। पटना में विधायक दल की बैठक में उनके नाम का ऐलान किया गया। सम्राट चौधरी यूं ही नहीं मोदी और शाह की भरोसेमंद लिस्ट में शामिल हुए। उनके बिहार के मुखिया के पद तक पहुंचने की यात्रा काफी दिलचस्प रही।
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ओबीसी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी कुशवाहा यानी कोइरी समाज से ताल्लुक रखते हैं। वे साल 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसी साल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए में शामिल हुए थे। तब सम्राट चौधरी पंचायती राज मंत्री बने थे। 9 साल में ही सम्राट चौधरी भाजपा जैसी कैडर बेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं। अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने फिर से एनडीए का दामन छोड़ा था, तब बीजेपी ने सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था।
भाजपा में आने से पहले वे राजद अध्यक्ष लालू यादव की टीम के सिपाही हुआ करते थे। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कभी भाजपाई नहीं रहे। वे समता पार्टी का हिस्सा थे। सम्राट चौधरी दो बार परबत्ता से विधायक रहे, दो बार विधान परिषद के सदस्य रहे, कई विधायी और प्रशासनिक क्षेत्र में काम का अनुभव। दो बार के डिप्टी सीएम। 2024 में डिप्टी सीएम के साथ-साथ वित्त मंत्री बनाए गए।
नवंबर, 2025 में डिप्टी सीएम के साथ-साथ गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मिली। 1990 में सक्रिय राजनीति में आने वाले सम्राट चौधरी 1995 में 89 दिनों के लिए जेल गए थे। बिहार विधान परिषद की साइट पर इस बात का जिक्र है। जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्री रहते जब नीतीश कुमार से उनकी खटपट हुई थी तो सम्राट चौधरी ने राजद के कुछ विधायकों के साथ मांझी का साथ दिया था।

सम्राट चौधरी बीजेपी में उन नेताओं में शामिल हैं, जो आरएसएस बैकग्राउंड से नहीं आते हैं। नीतीश कुमार जब एनडीए से अलग होकर राजद के साथ गए थे, तब बीजेपी ने सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर सत्ता में वापसी की जिम्मेदारी सौंपी। उस वक्त सम्राट चौधरी ने भी नीतीश को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने तक सिर पर मुरेठा (पगड़ी) बांधे रखने का संकल्प लिया था। उनके इसी संकल्प से वे मुख्मयंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। Edited by : Sudhir Sharma
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