मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. नन्ही दुनिया
  3. कविता
  4. Diwali kids poem
Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 26 अक्टूबर 2024 (16:59 IST)

दिवाली कविता : दीपों से दीप जले

Diwali kids poem
दिवाली खुशियों की लाती बहार है।
लक्ष्मी की पूजा को हम सब तैयार हैं।।
 
फेंक दो वे सब चीजें हुईं जो बेकार हैं। 
नई-नई चीजों से घर का श्रृंगार है।।
 
दीपों से दीप जले फैली चमकार है।
फुलझड़ी पटाखे हैं चकरी-अनार हैं।।
 
ध्यान रखें उनका भी लोग जो बीमार हैं।
कष्ट देता शोर और धुआं धक्कार है।।
 
स्वच्छता दीपावली का सबको उपहार है।
रक्षा करना इसकी अपना संस्कार है।।
 
- पंकज डेहरिया
साभार- देवपुत्र 

mgid

aniview

ये भी पढ़ें
लाओस, जहां सनातन हिन्दू धर्म मुख्‍य धर्म था, आज भी होती है शिवभक्ति