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Last Updated : मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026 (14:48 IST)

इंदौर में क्‍यों अचानक लापता हो रहे बच्‍चे, बाणगंगा और चंदन नगर बने हॉटस्‍पॉट, इन शहरों में भी सक्रिय हैं गैंग्‍स

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इंदौर और इंदौर के आसपास के इलाकों से लगातार बच्‍चों के लापता होने की खबरें सामने आ रही हैं। पिछले कुछ दिनों से इंदौर, धार, खरगोन और इनके आसपास के क्षेत्रों से बच्‍चे लापता या अचानक गायब हुए हैं।

बच्‍चों के लापता होने के पीछे कुछ गैंग के सक्रिय होने की बात भी सामने आ रही है। इन गैंग्‍स में कम उम की लड़कियां भी शामिल हैं, जो बच्‍चों को बहला फुसलाकर ले जाती हैं। हाल ही में इंदौर में कुछ बच्‍चों के अचानक लापता होने के मामले सामने आए हैं। इंदौर पुलिस का इसमें कहना है कि वे लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। ऑपरेशन मुस्‍कान के तहत बच्‍चों को खोजने का काम भी जारी है।

डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमारे पास अब तक कोई शिकायत नहीं आई है, अलग अलग थानों के मामले हो सकते हैं, मैं पता कर के बताता हूं।

कहां लापता हुआ कान्‍हा ठाकुर : सिरपुर की नट कॉलोनी का रहने वाला कान्‍हा ठाकुर 01 फरवरी रविवार की दोपहर करीब 2:00 बजे यह कहकर घर से निकला था कि वह घूमकर आ रहा है, लेकिन वह अब तक वापस नहीं लौटा। वहीं शाजापुर के ज्‍योति नगर से एक 5 साल का बालक लापता हो गया, जिसका अब तक कोई सुराग नहीं लगा है। रूपेश मंडलोई 13 साल और नैतिक अहिरवार 12 साल पिछले कुछ दिनों से गायब हैं। वे लोहिया कॉलोनी कबीट खेडी के रहने वाले हैं। दोनों 28 जनवरी 2026 को स्‍कूल गए थे, लेकिन वापस नहीं लौटे।

इंदौर के हॉटस्पॉट क्षेत्र : विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इंदौर के कुछ विशेष थाना क्षेत्रों में लापता होने के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं। वहीं, राऊ रंगवासा स्थित उमिया धाम के पास बच्चा पकड़ने वाली गैंग का सदस्य धराया, जिसका वीडियो हाल ही में वायरल हुआ है।

इन इलाकों में लापता हो रहे बच्‍चे : बाणगंगा में बच्चों (विशेषकर लड़कियों) के लापता होने की संख्या सबसे अधिक रही है। वहीं, लसूडिया और चंदन नगर इलाके भी इस सूची में संवेदनशील माने गए हैं।

चौंकाने वाले आंकड़े : अगस्त 2025 में जारी सरकारी डेटा के के मुताबिक पिछले साढ़े चार वर्षों में मध्य प्रदेश से लगभग 59,000 से अधिक बच्चे लापता हुए हैं। इंदौर इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां करीब 4 हजार 574 मामले दर्ज किए गए (इनमें 3,560 लड़कियां और 1,014 लड़के शामिल) हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इनमें से बड़ी संख्या में बच्चों को पुलिस ने 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत ढूंढ निकाला है, लेकिन अभी भी कई बच्चे लापता हैं।

कई इलाकों में गैंग सक्रिय : बता दें कि इंदौर समेत खरगोन खंडवा आदि शहरों में बच्‍चों को चुराने या ले जाने वाली गैंग सक्रिय हैं। इन गैंग में कम उम्र की लड़कियां भी शामिल हैं। जो बच्चों को बहला-फुसलाकर निशाना बनाती हैं। यह गैंग विशेष रूप से गली-मोहल्लों में खेलते छोटे बच्चे कॉलोनियों के पार्क प्ले-स्कूल के बाहर बच्चों को टारगेट कर रही हैं। हाल ही में इंदौर में बच्‍चा चुराने के आरोप में कुछ रहवासियों ने एक महिला की पिटाई की थी।

पुलिस की कार्रवाई और ऑपरेशन मुस्कान : इंदौर पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस लगातार 'ऑपरेशन मुस्कान' (Operation Muskaan) चला रही है। हाल ही में दिसंबर 2025 में, इंदौर का एक बच्चा जो 10 साल पहले (2015 में) गायब हुआ था, उसे शिवपुरी के एक चाय के स्टाल से छुड़ाकर परिवार से मिलाया गया। बता दें कि ज्‍यादातर बच्‍चे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और ढाबों जैसे इलाकों से गायब हो रहे हैं, यहां पुलिस सघन चेकिंग कर रही है।

सुरक्षा के लिए क्या करें : अगर कोई बच्चा लापता होता है, तो तुरंत 100 या 1098 (Childline) पर कॉल करें। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, नाबालिग के लापता होने पर पुलिस को तुरंत धारा 363 (अपहरण) के तहत FIR दर्ज करनी होती है। बच्चों को कभी भी घर के बाहर सड़क पर अकेला न घूमने दें, खासकर सुनसान समय में।

सीक्रेट कोड : अपने बच्चे को एक ‘सीक्रेट कोड’ सिखाएं। उनसे कहें कि अगर कोई अनजान व्यक्ति यह कहे कि “तुम्हारी मम्मी ने बुलाया है”, तो जब तक वह व्यक्ति वो कोड न बताए, बच्चा उसके साथ न जाए। बाज़ार या मेले में बच्चे का हाथ कभी न छोड़ें। उनके कपड़ों में अपना मोबाइल नंबर लिखकर एक छोटी पर्ची रख दें। किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें, हर समय बच्चों पर सीधी नजर रखें।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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