पिता के बलात्कार से नाबालिग लड़की गर्भवती, आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने के मामले में यहां 14 वर्षीय स्कूली छात्रा से बलात्कार के आरोप में उसके पिता को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस लड़की के पेट में करीब छह माह का गर्भ है और प्रसव की स्थिति में उसकी जान को खतरा हो सकता है।
आजाद नगर पुलिस थाने की एक महिला सब इंस्पेक्टर ने सोमवार को बताया कि मूसाखेड़ी क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग लड़की ने अपने 38 वर्षीय पिता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है कि वह लम्बे समय से उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार कर रहा था। आरोप है कि यह घिनौनी हरकत लड़की को डरा-धमकाकर रात में की जाती, जब घर के सभी लोग सो जाते थे।
उन्होंने बताया कि मामले का खुलासा कुछ दिन पहले हुआ, जब लड़की के पेट में दर्द बढ़ा और उसने अपनी मां से इसकी शिकायत की। मां जब अपनी बेटी को एक डॉक्टर के पास ले गई, तो उसने जांच के बाद बताया कि उसे लगभग छह माह का गर्भ है।
सब इंस्पेक्टर ने बताया कि पुलिस ने नाबालिग लड़की की शिकायत पर उसके पिता के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 376 (दुष्कर्म) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
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आरोपी को शनिवार को गिरफ्तार कर एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया है। मामले में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक गर्भवती लड़की ने अपने पिता की गंदी हरकत की जानकारी मां को समय रहते इसलिए नहीं दी, क्योंकि वह (मां) निम्न रक्तचाप की मरीज है।
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लड़की को डर था कि मां को आपबीती बताने से उसकी तबीयत बिगड़ सकती है। पुलिस ने अदालत में लड़की के बयान दर्ज कराने के बाद उसे उसकी मां के सुपुर्द कर दिया है। इस बीच, बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था चाइल्डलाइन ने बलात्कार पीड़ित लड़की की आज काउंसलिंग की।
चाइल्डलाइन के स्थानीय निदेशक वसीम इकबाल ने बताया कि लड़की आठवीं की छात्रा है और इन दिनों उसकी वार्षिक परीक्षा चल रही है। उसका 30 मार्च को आखिरी पर्चा है। इकबाल ने बताया, पूरे घटनाक्रम के बाद लड़की डरी-सहमी है।
उन्होंने बताया कि हमने उसका हौसला बढ़ाते हुए उससे कहा है कि वह फिलहाल अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करे। हम लड़की और उसके परिवार को हरसंभव मदद मुहैया कराएंगे। उन्होंने बताया कि गर्भवती लड़की की शारीरिक स्थिति ऐसी प्रतीत नहीं होती कि वह सुरक्षित तौर पर बच्चे को जन्म दे सके। लिहाजा प्रसव की सूरत में उसकी जान को खतरा हो सकता है।
इकबाल ने कहा, चाइल्डलाइन इस सिलसिले में स्त्री रोग विशेषज्ञों और वकीलों से सलाह ले रही है कि लड़की के अनचाहे गर्भ को गिराने की कानूनी अनुमति के लिए किस तरह अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।