कविता : कब समझेगा वह नासमझ राष्ट्र...
आतंकवादियों की खोज
होती रही सारे जहान में।
अमेरिका-यूरोप में, अफ्रीका-मिडिल ईस्ट में, ईरान में।।
इने-गिने कुछ मिले यहां (कश्मीर में), हिन्दुस्तान में।
बकौल 'सिक्योरिटी काउंसिल' (यू.एन.ओ.)
एक सौ उन्चालिस मिले पाकिस्तान में ।।1।।
कौन समझाए उस नासमझ देश को
आतंकवाद शेर की सवारी है।
राष्ट्र की जड़ों को करती खोखला,
यह ऐसी महामारी है ।।
सीरिया देश की बर्बादी का ताजा-तरीन
उदाहरण है सामने,
यह कल का दावानल है,
भले ही आज एक चिंगारी है ।।2।।
अपने पड़ोसी देशों के लिए,
भारत तो विकास-मॉडल बनने को अग्रसर है।
जहां जी.डी.पी. की वृद्धि दर स्थिर,
अपनी सीमाओं में मूल्य-स्तर है।
छुट-पुट हलचलों के बावजूद
राजनीतिक चेतना है स्तरीय यहां,
स्वच्छ प्रशासन, परिश्रमी सरकार,
अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा शीर्ष पर है ।।3।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय के डीन पद पर 1991 से 1993 तक रहे। डॉ. सिंगी की चारों वेद, गीता, उपनिषद्, अठारह पुराण पर पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उनके तीन कविता संग्रह इन्द्रधनुष, लहरें, प्रवाह के अतिरिक्त जीवन उपयोगी सूत्र पर 'अच्छा जीवन जीने के लिए' एक पुस्तक का प्रकाशन भी हुआ।....
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